गाजियाबाद गोल्ड लोन घोटाले में बड़ा खुलासा, नकली सोने के साथ कई ग्राहक भी निकले फर्जी

HIGHLIGHTS
- फेडरल बैंक की आरडीसी शाखा से जुड़ा है मामला
- नकली सोने के आभूषण गिरवी रखकर गोल्ड लोन लेने का आरोप
- मामले में कुल 1.46 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन लिया गया
- जांच में कई नामजद ग्राहक मौके पर नहीं मिले
- कुछ पतों पर संबंधित व्यक्ति के रहने की पुष्टि नहीं हो सकी
गाजियाबाद। फेडरल बैंक की आरडीसी शाखा में नकली सोने के आभूषण गिरवी रखकर 1.46 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन लेने के मामले में जांच के दौरान एक और अहम बात सामने आई है। मामले में केवल गिरवी रखे गए सोने के आभूषण ही नकली नहीं थे, बल्कि लोन खातों में दर्ज कई ग्राहक भी फर्जी पाए गए हैं। यानी इन लोगों को वास्तव में गोल्ड लोन की जरूरत नहीं थी और उनके पास लोन के लिए सोना भी मौजूद नहीं था।
लोन खातों में दर्ज पतों की जांच के दौरान कई नामजद ग्राहक अपने बताए गए पते पर नहीं मिले। कुछ स्थानों पर संबंधित व्यक्ति के वहां रहने की पुष्टि भी नहीं हो सकी। आरोपितों ने ऐसे लोगों के नाम पर ग्राहक बनकर गोल्ड लोन कराया और बैंक में नकली सोने के आभूषण गिरवी रखवाए।
दो गोल्ड लोन में कुल 15.94 लाख रुपये जारी
दिल्ली गेट निवासी मयूर बंसल के नाम से दो गोल्ड लोन मंजूर कर कुल 15.94 लाख रुपये जारी किए गए। मयूर ने बताया कि उसे एक अन्य आरोपित मोसीम ने लोन दिलाया था। इसके बदले उसे केवल 15 हजार रुपये दिए गए। उसके अनुसार, खाते में पहुंची लोन की रकम मोसीम और एक अन्य व्यक्ति ने अपने खाते में ट्रांसफर करा ली थी, जबकि कुछ रकम नकद ले ली गई थी। मयूर ने बताया कि उसे रुपयों की जरूरत थी, इसलिए वह आरोपितों के बहकावे में आ गया।
पता भी पड़ताल में ट्रेस नहीं हो सका
रूपीक कंपनी की ओर से कराई गई मौके की जांच में भी कई पते संदिग्ध मिले। शांतिनगर निवासी कविता और शिवपुरी निवासी मोसिम खान अपने बताए गए पते पर नहीं मिले। साहिल सिंह और मोसिम खान का पता एक ही दर्ज है। वहीं विजयनगर सेक्टर-9 निवासी मुकुल कुमार और प्रताप विहार निवासी अलीबिन हुसैन का पता भी जांच के दौरान ट्रेस नहीं हो सका।
वसीम को पूर्व आरएम अजहर का रिश्तेदार बताया
प्रताप विहार निवासी वसीम अब्बास के घर जांच के दौरान उसका भाई निसार मिला। उसने बताया कि वसीम काम पर गया हुआ है। बाद में वसीम ने फोन पर बताया कि उसने अपने घर का सोना गिरवी रखा था और लोन की किस्त चुका रहा है। रूपीक की जांच में वसीम को पूर्व आरएम अजहर का रिश्तेदार बताया गया है। वहीं अलीबिन हुसैन के बारे में जांच में सामने आया कि वह अजहर के गांव का व्यक्ति है।
लोन लेने के बाद किस्त चुकाने में भी खेल
जांच में सामने आया कि अलीबिन हुसैन को छोड़कर किसी अन्य ने लोन की किस्त नहीं चुकाई। तीन किस्त नहीं आने पर खातों को एनपीए घोषित किया जाता है और रूपीक कंपनी में सभी खाते एनपीए हो चुके हैं।
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