सरकारी भूमि कब्जा मामला: संभल में शाही इमाम और भाई के खिलाफ एफआईआर दर्ज

HIGHLIGHTS
- संभल कोतवाली क्षेत्र के गांव सैफखां सराय में स्थित मजार, मस्जिद और शाही इमाम के मकान से जुड़े मामले में नया मोड़ सामने आया है।
- लेखपाल की तहरीर पर संभल की जामा मस्जिद के शाही इमाम आफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन के खिलाफ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला दर्ज कराया गया है।
- यह कार्रवाई संभल कोतवाली में दर्ज की गई है।
- सुल्तानपुर बुजुर्ग क्षेत्र के हल्का लेखपाल मुकेश कुमार यादव ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि गाटा संख्या 452 की भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित थी और चकबंदी प्रक्र…
संभल कोतवाली क्षेत्र के गांव सैफखां सराय में स्थित मजार, मस्जिद और शाही इमाम के मकान से जुड़े मामले में नया मोड़ सामने आया है। लेखपाल की तहरीर पर संभल की जामा मस्जिद के शाही इमाम आफताब हुसैन वारसी और उनके भाई मेहताब हुसैन के खिलाफ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला दर्ज कराया गया है।
यह कार्रवाई संभल कोतवाली में दर्ज की गई है। सुल्तानपुर बुजुर्ग क्षेत्र के हल्का लेखपाल मुकेश कुमार यादव ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि गाटा संख्या 452 की भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित थी और चकबंदी प्रक्रिया के दौरान इसे पौधारोपण के लिए सुरक्षित किया गया था। ऐसे में इस भूमि पर किसी भी प्रकार का निजी कब्जा अवैध माना जाता है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आफताब हुसैन वारसी और मेहताब हुसैन ने इस भूमि पर कब्जा कर रखा है, जबकि वर्ष 1410-1415 फसली में उनका नाम खतौनी में श्रेणी-चार के रूप में दर्ज था। बाद में 27 जनवरी 2003 को तहसीलदार ने उनका नाम रिकॉर्ड से हटाते हुए जमीन को पुनः ग्राम समाज की संपत्ति में दर्ज कर दिया था। इसके बावजूद आरोप है कि उन्होंने जमीन पर कब्जा बनाए रखा, जो संभल-चंदौसी मुख्य मार्ग से जुड़ी हुई अहम भूमि है।
वक्फ बोर्ड में पंजीकरण को लेकर आरोप
लेखपाल का यह भी कहना है कि कब्जे को वैध दिखाने के लिए संबंधित व्यक्तियों ने गलत जानकारी देकर वक्फ बोर्ड में आवेदन किया। आवेदन में यह तथ्य नहीं बताया गया कि भूमि सार्वजनिक संपत्ति है। केवल सीमाओं का उल्लेख कर इसे वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज करा लिया गया, जिसके चलते वर्षों तक कब्जा बना रहा।
पहले भी लग चुका है जुर्माना
इस मामले में तहसीलदार न्यायालय पहले ही मस्जिद, मजार और मकान को सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण मानते हुए शाही इमाम और उनके भाई पर लगभग सात करोड़ रुपये का जुर्माना लगा चुका है। हालांकि इस फैसले के खिलाफ डीएम कोर्ट में अपील दायर की गई है, जिस पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और निर्णय सुरक्षित रखा गया है। अब इस मामले में किसी भी समय अंतिम फैसला आने की संभावना है।
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