हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित, बिना वोटिंग पहुंचे संसद

HIGHLIGHTS
- केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए।
- पांच नवंबर को दोपहर तीन बजे नाम वापसी की समयसीमा समाप्त होने के बाद उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं बचा।
- उपचुनाव में राजकुमार लोहानी और कांते सयन्ना ने भी नामांकन दाखिल किया था।
हरदीप सिंह पुरी बिना मतदान के राज्यसभा कैसे पहुंचे?
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक खाली सीट को भरने के लिए उपचुनाव कराया जा रहा था। भाजपा ने इस सीट से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया था। उनके अलावा राजकुमार लोहानी और कांते सयन्ना ने भी चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था।
हालांकि, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दोनों अन्य उम्मीदवारों के पर्चे खारिज कर दिए गए। इसके बाद चुनाव में पुरी ही एकमात्र प्रत्याशी बचे।
पांच नवंबर को दोपहर तीन बजे तक नाम वापस लेने का समय निर्धारित था। इस समयसीमा तक किसी अन्य उम्मीदवार ने चुनाव मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज नहीं कराई। ऐसे में हरदीप सिंह पुरी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। इस तरह राज्यसभा की इस सीट पर मतदान कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
किन वजहों से खारिज हुए दो उम्मीदवारों के नामांकन?
रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश में दोनों उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने की अलग-अलग वजह बताई गई हैं। कांते सयन्ना का पर्चा आवश्यक प्रस्तावकों के हस्ताक्षर नहीं होने के कारण खारिज किया गया।
नियमों के मुताबिक, उनके नामांकन पत्र पर विधानसभा के कम से कम 10 निर्वाचित सदस्यों या कुल निर्वाचित सदस्यों के 10 प्रतिशत के हस्ताक्षर होने जरूरी थे। इन दोनों में जो संख्या कम होती, उतने प्रस्तावकों के हस्ताक्षर अनिवार्य थे। आवश्यक शर्त पूरी नहीं होने के चलते उनका नामांकन स्वीकार नहीं किया गया।
वहीं, राजकुमार लोहानी का पर्चा फॉर्म-26 का अनिवार्य शपथपत्र निर्धारित समय में जमा नहीं करने के कारण रद्द हुआ। उन्हें दो नवंबर को दोपहर तीन बजे तक यह दस्तावेज जमा करना था, लेकिन तय समयसीमा के भीतर शपथपत्र जमा नहीं किया गया।
हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पर कांग्रेस ने क्यों जताई थी आपत्ति?
हरदीप सिंह पुरी ने 31 अक्टूबर को भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विधानसभा में अपना नामांकन दाखिल किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित राज्य सरकार के कई मंत्री मौजूद रहे थे।
इसके बाद तीन नवंबर को रिटर्निंग ऑफिसर ने पुरी के नामांकन पत्रों को स्वीकार कर लिया। इससे पहले कांग्रेस नेताओं और निर्दलीय उम्मीदवारों की ओर से उनके नामांकन पर कुछ आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।
हालांकि, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान इन आपत्तियों को खारिज कर दिया गया। इसके बाद हरदीप सिंह पुरी का नामांकन वैध घोषित किया गया और चुनाव लड़ने का उनका रास्ता साफ हो गया।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी राज्यसभा की सीट
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की जिस सीट पर हरदीप सिंह पुरी निर्विरोध चुने गए हैं, वह केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। मुरुगन ने 14 अक्टूबर को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
उनका राज्यसभा कार्यकाल मूल रूप से दो अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। हालांकि, उनके इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हो गई और इसे भरने के लिए उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई।
भाजपा ने इस सीट पर हरदीप सिंह पुरी को अपना उम्मीदवार बनाया था। नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके मुकाबले कोई अन्य प्रत्याशी नहीं बचा। इसके चलते पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
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