हिमाचल: तीन दिवसीय बजट सत्र का आगाज़, आरडीजी और वित्तीय प्रस्तावों पर चर्चा होगी

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार दोपहर 2 बजे शुरू हुआ। सत्र की शुरुआत राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के अभिभाषण से हुई, जिसे उन्होंने केवल कुछ हिस्सों तक पढ़ा। राज्यपाल ने कहा कि पैराग्राफ 3 से 16 में संविधानिक संस्थाओं पर टिप्पणी है और इसे पढ़ना उचित नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि पैराग्राफ 17 से आगे की सरकार की उपलब्धियों पर सभी विधायकों को खुद ध्यान देना चाहिए। इसके बाद सदन की कार्यवाही 2:45 बजे तक स्थगित कर दी गई।
सत्र की शुरूआत होते ही शोक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कुमारसैन के पूर्व विधायक भगत राम चौहान के निधन पर शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि उनके जाने से प्रदेश को अपूरणीय क्षति हुई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी उनके योगदान को याद रखने की बात कही। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, और अन्य विधायकों ने भी उनके व्यक्तित्व और विधानसभा क्षेत्र के विकास में योगदान की सराहना की।
सत्र की पूर्व तैयारी के लिए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया की अध्यक्षता में दोपहर 12:15 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। बैठक में मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान और अन्य मुख्य सचेतक शामिल हुए। बैठक का मकसद बजट सत्र को निर्विघ्न और सुचारू रूप से संचालित करना था। बैठक में आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की गई।
सर्वदलीय बैठक में मुख्यमंत्री सुक्खू ने विपक्ष पर भी निशाना साधा और कहा कि आरडीजी पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह युवाओं, गरीबों और किसानों के हित का मुद्दा है। इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने बजट सत्र पर सवाल उठाया और कहा कि सत्र में असमंजस की स्थिति है, क्योंकि बजट पेश करने का समय तय नहीं है।
अभिभाषण के बाद सत्तापक्ष ने आरडीजी पर चर्चा कराने का प्रस्ताव सदन में पेश किया। नियम 102 के तहत इसे पहले दिन की कार्यसूची में शामिल कर लिया गया है। इससे सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के बीच हंगामे की संभावना बनी हुई है, क्योंकि दोनों पक्ष इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपना सकते हैं।
तीन दिवसीय बजट सत्र में आरडीजी, सरकारी उपलब्धियों और अन्य वित्तीय प्रस्तावों पर चर्चा होगी। सत्र के दौरान आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाने की संभावना भी है।
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