बस्तर में नक्सलवाद खत्म करने के बाद भी विकास पर फोकस जरूरी: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन और तेज विकास कार्यों को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi का भी यह मानना है कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी सरकार को संतोष नहीं करना चाहिए, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास पर लगातार काम जारी रहना चाहिए।
“नक्सलवाद का असली अंत विकास की भरपाई से होगा”
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद का वास्तविक खात्मा तभी माना जाएगा जब पिछले वर्षों में हुए नुकसान की पूरी भरपाई अगले पांच वर्षों में कर ली जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ हिंसा समाप्त करना नहीं, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
शाह ने कहा कि बस्तर के सभी गांवों को सक्रिय और आत्मनिर्भर आदिवासी समुदायों के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि डेयरी उद्योग और वनोपज आधारित गतिविधियां मिलकर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेंगी।
“बस्तर की असली आज़ादी अब मिल रही है”
उन्होंने कहा कि देश को भले ही आज़ादी 77–78 साल पहले मिल चुकी हो, लेकिन बस्तर जैसे क्षेत्रों के लिए वास्तविक स्वतंत्रता तब मानी जाएगी जब नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त होने के बाद 31 मार्च 2026 के बाद वहां विकास पूरी तरह स्थापित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान हुए नुकसान की भरपाई तेज गति से की जाएगी और केंद्र व राज्य सरकार मिलकर काम करेंगी।
विकास में बाधा बना नक्सलवाद
गृह मंत्री ने नक्सलियों के उस दावे को खारिज किया जिसमें कहा जाता है कि उन्होंने विकास की कमी के कारण हथियार उठाए। उन्होंने कहा कि असल में विकास इसलिए बाधित हुआ क्योंकि लंबे समय तक नक्सलियों की मौजूदगी और हिंसा ने क्षेत्र को पीछे धकेला।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे आत्मसमर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे अब विकास कार्यों को गति मिल रही है और सरकार जमीनी स्तर तक योजनाएं पहुंचा रही है।
गांवों तक सीधे पहुंच का लक्ष्य
शाह ने कहा कि आने वाले एक वर्ष के भीतर सरकार की पहुंच सीधे गांव-गांव तक सुनिश्चित की जाएगी, जिससे लोगों को बड़े शहरों या रायपुर तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
उन्होंने बताया कि बस्तर क्षेत्र में फिलहाल लगभग 196 सुरक्षा एवं प्रशासनिक कैंप संचालित हैं, और कुल संख्या करीब 200 के आसपास है। आने वाले डेढ़ साल में इनमें से 70 कैंपों को “सेवा गांव” के रूप में विकसित किया जाएगा।
आदिवासी कल्याण के लिए नए केंद्र
इन “सेवा गांव” को आदिवासी कल्याण और विकास केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां स्थानीय लोगों को बुनियादी सुविधाएं और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा।
गृह मंत्री ने कहा कि इस पूरी योजना की विस्तृत जानकारी वह जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से साझा करेंगे। उनका दावा है कि यह पहल बस्तर के आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगी।
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