चंडीगढ़ में 26 नवंबर को किसान महापंचायत, अधूरी मांगों को लेकर तेज होगा विरोध

चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा की राजधानी में 26 नवंबर को किसानों की बड़ी महापंचायत आयोजित की जा रही है। यह महापंचायत संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर सेक्टर-43बी में होगी और इसमें पंजाब समेत देशभर से हजारों किसान शामिल होंगे। यह आयोजन ऐतिहासिक किसान आंदोलन की जीत और उसकी पांचवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।
भाकियू (लक्खोवाल) के प्रदेश अध्यक्ष हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने बताया कि महापंचायत के दौरान एसकेएम केंद्र और पंजाब सरकार को अपनी अधूरी मांगों का मांगपत्र सौंपेगा। प्रमुख मांगों में एमएसपी की कानूनी गारंटी, चंडीगढ़ पर पंजाब का पूर्ण अधिकार, पंजाब यूनिवर्सिटी को पंजाब का दर्जा बहाल करना और राज्य के जल संसाधनों पर हक सुनिश्चित करना शामिल हैं।
लक्खोवाल ने चेतावनी दी कि यदि दिल्ली आंदोलन के दौरान मान ली गई मांगों को लागू नहीं किया गया तो किसान मजबूरन नया संघर्ष छेड़ेंगे। इसके अलावा बिजली संशोधन विधेयक 2025 को रद्द करना, बाढ़ प्रभावित किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान, गन्ना उत्पादक किसानों को भुगतान और सहूलियतें सुनिश्चित करना और केंद्र के नए श्रम कानूनों (चार लेबर कोड) का विरोध भी प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
एसकेएम की योजना है कि महापंचायत के साथ जम्मू संभाग के सभी 10 जिलों और दूरदराज की तहसीलों में भी धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जाएं। आंदोलन को प्रभावशाली बनाने के लिए सोशल मीडिया का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा।
महापंचायत की तैयारी को लेकर जिला तरनतारन में भी बैठक आयोजित की गई, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी तय कोटा के अनुसार अपने क्षेत्रों से रैली में भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। तरनतारन के किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून वापस लेने और फसलों का दाम स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार देने का वादा किया था, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। पंजाब के जल संसाधनों और कृषि उत्पादों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ किसान रैली में मजबूती से आवाज उठाएंगे।
महापंचायत में भाकियू और अन्य किसान संगठनों के बड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिनमें दलजीत सिंह दयालपुरा, बलबीर सिंह झामका, गुरसाहिब सिंह दल, दिलबाग सिंह लखोवाल सहित अन्य कई किसान नेता मौजूद रहेंगे।
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