मल्लिकार्जुन खरगे की मांग- लोकसभा और सभी विधानसभाएं भंग हों, बैलेट पेपर से कराए जाएं चुनाव

HIGHLIGHTS
- मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में अपनी मांग रखी।
- उन्होंने SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाया।
- खरगे ने दावा किया कि SIR का असर गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों पर पड़ रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को लोकसभा के साथ सभी राज्य विधानसभाओं को भंग करने और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि देश में अब तक हुए सभी चुनाव गैर-कानूनी हैं और इसी आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा राज्यों के मुख्यमंत्री भी गैर-कानूनी हैं। खरगे ने कहा कि सभी सदनों को भंग करके दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए और इन चुनावों में ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर का इस्तेमाल होना चाहिए।
‘पूरा देश गैर-कानूनी चुनावों के आधार पर चल रहा’
पत्रकारों से बातचीत में मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि वर्तमान में पूरा देश गैर-कानूनी चुनावों के आधार पर चल रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी गैर-कानूनी बताया और सभी सदनों को भंग कर नए चुनाव कराने की मांग की।
अपने भाषण के दौरान खरगे ने ईवीएम के कथित गलत इस्तेमाल का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में ‘उनके अपने लोग’ भी बात कर रहे हैं।
SIR की प्रक्रिया पर खरगे ने उठाए सवाल
कर्नाटक में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने देश के कई राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां हैं और सरकार की ओर से कई गलतियां की जा रही हैं। उनके मुताबिक इसका सीधा प्रभाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर पड़ रहा है और लोकतंत्र कमजोर हो रहा है।
खरगे ने कहा कि विपक्ष SIR और चुनावी प्रक्रिया के कथित गलत इस्तेमाल के खिलाफ देशभर में अपना आंदोलन जारी रखेगा।
INDIA गठबंधन की बैठक में SIR पर क्या हुई चर्चा?
मल्लिकार्जुन खरगे ने SIR को लेकर INDIA गठबंधन की बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 30 सितंबर को हुई बैठक में 20 राजनीतिक दलों के सदस्य और उनके कानूनी प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
खरगे के अनुसार, बैठक में सभी दल इस बात पर सहमत थे कि SIR देश के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है। उन्होंने दावा किया कि इसका सबसे अधिक असर गरीबों, कम पढ़े-लिखे लोगों, मजदूरों और खास तौर पर अल्पसंख्यकों पर पड़ रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी एक बूथ की मतदाता सूची से 500 वोट हटा दिए जाएं तो इसे निष्पक्ष चुनाव कैसे कहा जा सकता है। खरगे ने आरोप लगाया कि एक ओर मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी चल रही है।
खरगे का आरोप है कि BJP और RSS से जुड़े कई लोग वार्डों, पंचायतों और गांवों में जाकर उन लोगों के फॉर्म भरवा रहे हैं, जिनके वोट हटाए जाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे पूरी तरह गलत बताया।
पुराने नेताओं का उदाहरण देकर क्या बोले खरगे?
खरगे ने कहा कि देश के पुराने नेताओं ने लोकतंत्र में इस तरह की कार्रवाई नहीं की। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, नरसिम्हा राव और राजीव गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले किसी नेता ने इस तरह की कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह SIR का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे युवाओं, गरीबों, दलितों और वंचित वर्गों को नुकसान हो रहा है।
गरीब और अमीर के बीच की परेशानियों का उदाहरण देते हुए खरगे ने कहा कि अमीर व्यक्ति किसी तरह अपना काम करा सकता है, लेकिन किसी गरीब के वोटर लिस्ट में गड़बड़ी होने पर उसे अपना काम छोड़कर उसे ठीक कराने या नाम रिन्यू कराने के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
2023 के कानून पर खरगे ने उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर भी सवाल उठाए। उन्होंने खास तौर पर कानून की धारा 16 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को पद पर रहते हुए लिए गए फैसलों के लिए कानूनी कार्रवाई से छूट दी गई है।
खरगे ने कहा कि पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश, विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री शामिल होते थे। लेकिन 2023 के कानून में मुख्य न्यायाधीश को समिति से हटाकर उनकी जगह एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया। उन्होंने सवाल किया कि ऐसा क्यों किया गया।
खरगे का कहना है कि अगर भविष्य में कोई ईमानदार मुख्य न्यायाधीश सरकार से सहमत नहीं हुआ तो सरकार के लिए अपनी पसंद का मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त करना मुश्किल हो सकता था।
चुनाव आयुक्तों की जवाबदेही पर भी सवाल
नए कानून को लेकर खरगे ने कहा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त कोई गलती करते हैं तो उनके खिलाफ जांच का रास्ता भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
उन्होंने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के दो सदस्यों की चिट्ठियों का भी जिक्र किया। खरगे के मुताबिक, इन दोनों सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को क्रमशः 10 और 14 बार पत्र लिखे, लेकिन उनकी बातों का कोई असर नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि ये सदस्य बाहर खुलकर नहीं बोल सकते, लेकिन उन्होंने अपनी बात पत्रों के जरिए रखी है। खरगे ने आरोप लगाया कि अगर इसी तरह की स्थिति बनी रही तो चुनाव मनमाने तरीके से कराए जा सकते हैं।
लोकतंत्र को लेकर खरगे ने दी चेतावनी
खरगे ने कहा कि अब देश को तय करना होगा कि लोकतंत्र को बचाना है या खत्म होने देना है। उन्होंने बताया कि इसी मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी और सभी दलों से आंदोलन शुरू करने को कहा गया है।
उनके मुताबिक, दिल्ली में आंदोलन शुरू हो चुका है और 6 अक्टूबर को विपक्ष के सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। खरगे ने कहा कि विपक्ष लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार आंदोलन करता रहेगा।
उन्होंने बताया कि 6 अक्टूबर को बड़ा प्रदर्शन होगा और इसके बाद हर तीन-चार दिन में आंदोलन किए जाएंगे। उनके अनुसार, अलग-अलग राज्यों में भी इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई
मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बार फिर चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम लोगों को इस मुद्दे के बारे में जागरूक करना है।
खरगे ने कहा कि अगर लोगों को जागरूक करने के बाद भी वे लगातार मोदी-मोदी कहते रहेंगे तो यह उनकी अपनी पसंद है, लेकिन उन्होंने इसे तानाशाही चाहने से जोड़कर सवाल उठाया।
उत्तर प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर विपक्ष की रणनीति के सवाल पर खरगे ने कहा कि वे क्या कर सकते हैं और क्या चुनाव का बहिष्कार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कम से कम वे अभी जिंदा हैं और उनसे यह सवाल पूछा जा रहा है, हालांकि उन्होंने आगे कहा कि वह स्थिति भी खत्म हो सकती है।
कानूनी रास्ते को लेकर खरगे ने जताई नाराजगी
कानूनी रास्ते को लेकर पूछे गए सवाल पर खरगे ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कानूनी तौर पर वे क्या कर सकते हैं, जब उनके मुताबिक कानून सरकार के साथ है और न्यायपालिका भी सरकार के प्रभाव में है।
खरगे ने आगे आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग सरकार के हाथों में हैं और मशीनें भी उनके निर्देश पर चल रही हैं। उन्होंने वोट बदलने का भी आरोप लगाया और कहा कि इसी वजह से मोदी और शाह को सबसे पहले लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए सत्ता से बाहर होना चाहिए।
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