दरोगा भर्ती की मेंस परीक्षा रद्द होने पर पटना में प्रदर्शन, अभ्यर्थियों ने तोड़ी बैरिकेडिंग

HIGHLIGHTS
- अभ्यर्थियों ने गांधी मैदान से जेपी गोलंबर तक मार्च शुरू किया।
- जेपी गोलंबर पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की।
- करीब 10 हजार अभ्यर्थियों का मेंस परीक्षा परिणाम जारी हुआ था।
पटना। करियर पर कोई संकट न आए, इसलिए कई अभ्यर्थी अपनी पहचान छिपाने को लेकर भी असमंजस में हैं। वहीं, सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रदर्शन करना भी जरूरी मान रहे हैं। इसी स्थिति के बीच सोमवार को दरोगा अभ्यर्थियों के जुटने में कुछ देरी हुई। सुबह 11 बजे से प्रदर्शन की तैयारी थी, लेकिन अभ्यर्थियों के पहुंचने में समय लगा। इसके बाद प्रदर्शन तेज हो गया और जमकर हंगामा हुआ।
दरोगा भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों का जत्था एक बार फिर पटना में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए निकला। प्रदर्शनकारियों के नारे से माहौल गूंजता रहा और कई रास्तों पर यातायात प्रभावित हुआ। अभ्यर्थियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी, जिसके बाद उन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसके बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर होकर डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ने लगे।
पुलिस ने रोका, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई
पटना में दरोगा भर्ती परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध एक बार फिर तेज हो गया। सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी गांधी मैदान से जेपी गोलंबर की तरफ मार्च करने निकले। जेपी गोलंबर के पास पटना पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। मौके पर पुलिस के साथ बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।
पटना जिला प्रशासन की ओर से अभ्यर्थियों से अपील की गई कि वे अपने प्रतिनिधिमंडल के जरिए सरकार से मिलकर अपनी मांग रखें। प्रशासन का कहना है कि इस तरह धरना-प्रदर्शन करने से कोई फायदा नहीं होगा और इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, अभ्यर्थी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखने की मांग पर अड़े रहे। जेपी गोलंबर के पास सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने के बाद जब वे डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ने लगे तो बैरिकेड तोड़ दिए गए। इसके बाद पुलिस ने लाठियां भांजीं।
1799 पदों की भर्ती में मेंस परीक्षा रद्द होने का विरोध
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी 1799 पदों पर होने वाली दरोगा भर्ती की रद्द की गई मेंस परीक्षा का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि काफी मेहनत के बाद उन्होंने प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी की और मेंस परीक्षा में भी सफलता हासिल की थी। करीब 10 हजार अभ्यर्थियों का परिणाम जारी किया गया था। अब मेंस परीक्षा रद्द होने से उनका भविष्य अधर में पड़ गया है।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुछ शिक्षा माफिया और छात्र नेताओं की शिकायत के आधार पर बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने मेंस परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई थी तो उसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए थी। पूरी परीक्षा रद्द करना अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है।
चार महीने से शारीरिक परीक्षा की तैयारी, तारीख जारी करने की मांग
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि मेंस परीक्षा पास करने के बाद वे करीब चार महीने से शारीरिक परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने के फैसले से उनकी मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
अभ्यर्थियों ने मांग की है कि मेंस परीक्षा रद्द करने का आदेश वापस लिया जाए और जल्द से जल्द शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीख घोषित की जाए।
उनका कहना है कि इनमें कई ऐसे अभ्यर्थी भी हैं, जिनकी उम्र सीमा अब पार हो चुकी है या जल्द ही पार होने वाली है। परिवार से आर्थिक मदद मिलना भी मुश्किल हो गया है। मेंस परीक्षा पास करने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि अब नौकरी मिल जाएगी, लेकिन अचानक परीक्षा रद्द किए जाने से सभी निराश हैं।
'जहां गड़बड़ी हुई, वहीं कार्रवाई हो, पूरी परीक्षा क्यों रद्द हो'
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा के दौरान किसी केंद्र पर गड़बड़ी हुई है तो संबंधित केंद्र और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनके मुताबिक पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करना उचित नहीं है।
उन्होंने चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी एक या दो बूथ पर गड़बड़ी होती है तो पूरे राज्य का चुनाव रद्द नहीं किया जाता। संबंधित बूथ या क्षेत्र में ही कार्रवाई की जाती है। इसी तरह दरोगा भर्ती परीक्षा में भी जहां गड़बड़ी हुई है, वहां जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
अभ्यर्थियों ने कहा कि गलती किसी और की होने पर उसकी सजा उन्हें क्यों दी जा रही है। वे बिहार के अलग-अलग जिलों से पटना आकर तैयारी कर रहे हैं। अब उनकी मांग है कि सरकार और आयोग जल्द उनकी मांगों पर फैसला लें, ताकि उनका भविष्य बर्बाद होने से बच सके।
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