अजीत भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, SC/ST एक्ट मामले में अग्रिम जमानत से इनकार

HIGHLIGHTS
- न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की अदालत में मामले की सुनवाई हुई।
- हाईकोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट की दो धाराओं का उल्लेख किया।
- अदालत ने अग्रिम जमानत पर वैधानिक रोक की बात कही।
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को यूट्यूबर अजीत भारती को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के एक मामले में अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। यह मामला सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर उनकी कथित टिप्पणियों से जुड़ा है। न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कहा कि एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(र) और 3(1)(स) के तहत प्रथम दृष्टया अपराध बनता है। अदालत ने कहा कि कानून के तहत अग्रिम जमानत पर रोक है और याचिका पोषणीय नहीं है। इसके साथ ही याचिका खारिज कर दी गई।
अजीत भारती ने निचली अदालत के 7 सितंबर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। निचली अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
भारती के खिलाफ 23 अगस्त को दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें एससी/एसटी एक्ट के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराएं लगाई गई थीं।
यह शिकायत आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध ने दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भारती ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किए गए एक वीडियो में दलित नेता और सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण तथा डॉ. बीआर आंबेडकर के खिलाफ जातिवादी और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इसके अलावा महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने और धमकियां देने के भी आरोप लगाए गए हैं।
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