यूपी में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर सख्त निर्देश, गांव में प्रक्रिया पूरी होते ही खत्म होगा क्षेत्राधिकार

HIGHLIGHTS
- निर्देश उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम-1953 के तहत जारी किए गए हैं।
- चकबंदी पूरी होने के बाद लंबित मामलों को निस्तारित माना जाएगा।
- प्रक्रिया खत्म होते ही गांव के सभी अभिलेख तहसील प्रशासन को देने होंगे।
लखनऊ। प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार ने अधिकारियों को निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने स्पष्ट किया है कि किसी गांव में चकबंदी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित चकबंदी अधिकारियों का क्षेत्राधिकार समाप्त हो जाएगा। इसके बाद चकबंदी से जुड़ी आपत्तियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम-1953 के तहत किसी गांव में चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लंबित मामलों को निस्तारित माना जाएगा। प्रक्रिया समाप्त होने के बाद संबंधित गांव के सभी अभिलेख तत्काल तहसील प्रशासन को सौंपने होंगे।
इसके साथ ही अभिलेखों में अंतिम रूप से किए गए संशोधनों से जुड़े आदेशों की प्रमाणित सूचियां तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इन सूचियों को अभिलेखागार, चकबंदी कार्यालय और तहसील में भेजा जाएगा।
यदि किसी गांव से संबंधित किसी आदेश को निरस्त कराने का मामला सामने आता है तो उसे तत्काल सक्षम स्तर के अधिकारी के पास भेजना होगा।
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