शी जिनपिंग और ट्रंप की मुलाकात, चीनी राष्ट्रपति बोले- प्रतिस्पर्धा की एक सीमा होनी चाहिए

HIGHLIGHTS
- शी जिनपिंग ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित संवाद की जरूरत बताई।
- संकट के समय अमेरिका और चीन के बीच संचार व्यवस्था बेहतर करने पर जोर दिया।
- ट्रंप ने 2016 से शी जिनपिंग के साथ आपसी सम्मान पर आधारित संबंधों का जिक्र किया।
वॉशिंगटन। अमेरिका दौरे पर पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात के दौरान दोनों देशों के संबंधों को लेकर अपना रुख रखा। जिनपिंग ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा स्वस्थ होनी चाहिए और उसकी एक सीमा तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आगे निकलने की प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, न कि ऐसी कुश्ती जिसमें एक की जीत और दूसरे की हार हो।
‘सहयोग की काफी गुंजाइश’
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका के हित एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग के लिए काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने दोनों देशों से ईमानदारी के साथ सहयोग करने और आपसी संवाद को मजबूत करने की अपील की। उनका कहना था कि दुनिया की कई समस्याओं का समाधान अमेरिका और चीन के साथ आए बिना मुश्किल होगा।
चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों को संघर्ष और टकराव से बचने की स्थिति बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने अमेरिका और चीन की सेनाओं के बीच नियमित बातचीत जारी रखने तथा संकट के समय संचार व्यवस्था को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
ट्रंप ने बताया ‘बेहद अच्छी दोस्ती’
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ अपने संबंधों को ‘बेहद अच्छी दोस्ती’ बताया। उन्होंने कहा कि 2016 में पहली बार राष्ट्रपति चुने जाने के समय से ही दोनों नेताओं के बीच आपसी सम्मान और दोनों देशों के हितों पर आधारित संबंध रहे हैं।
व्हाइट हाउस में शी के सम्मान में ट्रंप की खास दावत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप गुरुवार शाम व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में राजकीय रात्रिभोज की मेजबानी करेंगे। भारतीय समयानुसार यह कार्यक्रम शुक्रवार सुबह होगा। इसमें दोनों देशों के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के अलावा कारोबारी और सरकारी अधिकारी भी शामिल होंगे।
मेलानिया ट्रंप ने रात्रिभोज की तैयारियों की अगुवाई की है। कार्यक्रम में मेन्यू की शुरुआत अमेरिकी स्पार्कलिंग वाइन से होगी। इसे 1972 में चीन की यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और चीनी प्रधानमंत्री झोउ एनलाई के बीच हुए टोस्ट की याद में चुना गया है।
इसके बाद येलो स्क्वैश वेलूटे सूप के साथ जंगली मशरूम, क्रिस्पी पैनसेटा और स्कैलियन ऑयल परोसा जाएगा। मुख्य पकवान तिल से क्रस्टेड सी बास होगा। इसके साथ ब्रेज्ड बेबी बोक चॉय, रोस्टेड बैंगन और हर्ब सॉस दिया जाएगा।
खाने और सजावट में दिखेगा चीन-अमेरिका का मेल
डेजर्ट में वैनिला क्रेम्यू और व्हाइट हाउस के शहद से तैयार आइसक्रीम के साथ अखरोट फ्रैन्जिपेन और खट्टी चेरी कॉन्फी परोसी जाएगी। मेन्यू में स्कैलियन ऑयल, तिल और बोक चॉय जैसे चीनी स्वाद वाले तत्वों को अमेरिकी सामग्री और खाना पकाने की शैली के साथ शामिल किया गया है।
शाम के मनोरंजन के दौरान टेनर क्रिस्टोफर मैक्चियो प्रस्तुति देंगे। वह 2025 में ट्रंप के राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह में भी प्रस्तुति दे चुके हैं। अमेरिकी मरीन बैंड, मरीन ड्रम एंड बगल कॉर्प्स, आर्मी कोरस और आर्मी स्ट्रिंग्स भी कार्यक्रम में प्रस्तुति देंगे।
ईस्ट रूम की सजावट में लाल रंग को प्रमुखता दी जाएगी। प्रथम महिला कार्यालय के अनुसार, चीन में लाल रंग के सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए लाल फूलों, लिनेन और डहलिया-रैननकुलस से टेबल सजाई जाएंगी। इसके साथ व्हाइट हाउस कलेक्शन का वर्मील और रीगन स्टेट सर्विस के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
ट्रेड ट्रूस 10 जनवरी तक बढ़ाने पर सहमति
शी जिनपिंग की यात्रा शुरू होने से पहले अमेरिका और चीन के बीच व्यापार को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, दोनों देश मौजूदा ट्रेड ट्रूस को 10 जनवरी तक बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
इस अवधि में नए व्यापार प्रतिबंधों पर रोक जारी रहेगी। साथ ही दोनों देश टैरिफ, चीन के महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात और अमेरिका से कृषि उत्पादों की खरीद जैसे मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाएंगे।
टैरिफ और रेयर अर्थ पर बनी नजर
ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत में व्यापार का मुद्दा प्रमुख विषयों में शामिल है। अमेरिका चीन से आने वाले कुछ गैर-रणनीतिक सामान पर टैरिफ कम करने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहा है। वहीं चीन के रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिजों का मुद्दा भी अहम बना हुआ है। अमेरिका इन खनिजों की आपूर्ति के लिए अभी भी चीन पर काफी निर्भर है।
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