सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, वीडियो जारी कर बताए सरकार के तीन लिखित आश्वासन

HIGHLIGHTS
- सरकार के लिखित आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने 26वें दिन अपना अनशन समाप्त किया।
- सरकार ने छात्रों पर कार्रवाई नहीं करने, पीड़ित परिवारों को मुआवजा और संसद में चर्चा का आश्वासन दिया।
- वांगचुक ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर निराशा जताई, लेकिन मांगें मानने पर देशवासियों का आभार व्यक्त किया।
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में युवाओं के विरोध और विभिन्न राजनीतिक दलों के लगातार प्रदर्शनों के बीच गुरुवार को सरकार ने कई अहम फैसले और घोषणाएं कीं। इसी क्रम में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने 26वें दिन के अनशन को गुरुवार देर रात करीब 12:30 बजे समाप्त कर दिया।
सोनम वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ प्रतिनिधि उनसे मिलने पहुंचे थे। इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने हस्ताक्षरित पत्र भेजकर उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी। सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों ने भरोसा दिलाया कि नीट पेपर लीक और देश की परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा कराई जाएगी।
दो दिन चली बातचीत, लिखित आश्वासन के बाद खत्म किया अनशन
सोनम वांगचुक के मुताबिक, पिछले दो दिनों से सरकार के साथ उनकी लगातार बातचीत चल रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल मौखिक नहीं, बल्कि लिखित आश्वासन चाहते थे। इसी वजह से उनका अनशन दो दिन और जारी रहा। अंततः सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।
सरकार ने लिखित में दिए तीन प्रमुख आश्वासन
सोनम वांगचुक ने बताया कि सरकार ने लिखित रूप में निम्नलिखित आश्वासन दिए हैं—
- छात्रों पर नहीं होगी कार्रवाई: जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले और 20 जुलाई को संसद चलो मार्च में शामिल छात्रों एवं युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
- पीड़ित परिवारों को मुआवजा: पेपर लीक प्रकरण के कारण जान गंवाने वाले 20 से अधिक बच्चों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
- संसद में होगी विस्तृत चर्चा: परीक्षा प्रणाली में सुधार, पूरे मामले और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने को लेकर संसद में विस्तार से चर्चा होगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर क्या बोले वांगचुक?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के सवाल पर सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार इस संबंध में कोई समयसीमा या आश्वासन नहीं दे सकी। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो ही विकल्प थे—या तो कई सप्ताह तक भूख हड़ताल जारी रखकर अपनी जान जोखिम में डालते, या फिर अनशन समाप्त करते। उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन सप्ताह से हजारों लोग उनसे लगातार कह रहे थे कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए उनका जीवित रहना जरूरी है।
इस्तीफा न देना सरकार के लिए नुकसानदायक: वांगचुक
सोनम वांगचुक ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न होना सरकार के लिए ही नुकसानदायक साबित हो रहा है। उनका कहना था कि यदि मंत्री इस्तीफा दे देते तो सरकार का नुकसान वहीं रुक सकता था। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे अहम मुद्दा यह था कि आंदोलन में शामिल मासूम छात्रों पर कोई मुकदमा दर्ज न हो, क्योंकि उन्होंने लद्दाख में देखा है कि किस तरह एफआईआर बच्चों के भविष्य को प्रभावित करती है। अंत में उन्होंने अपनी मांगों पर सहमति बनने पर संतोष जताया और आंदोलन के दौरान सहयोग व समर्थन देने वाले सभी देशवासियों का आभार व्यक्त किया।
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