यूपी में खाद की कालाबाजारी पर बड़ा एक्शन, 7364 जगहों पर छापे; 136 लाइसेंस सस्पेंड

HIGHLIGHTS
- उत्तर प्रदेश में खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए कृषि विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक 7364 छापों में 136 लाइसेंस निलंबित और 35 निरस्त किए गए हैं।
- प्रदेश में 20 जुलाई तक यूरिया, डीएपी, एनपीके समेत अन्य उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक होने की जानकारी दी गई। कृषि मंत्री ने किसानों से अनावश्यक भंडारण नहीं करने की अपील की।
- पशुओं के चारे की उपलब्धता और कृषि-पशुपालन-पर्यटन के एकीकृत विकास मॉडल को लेकर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतिकरण दिया, जिस पर कार्य योजना तैयार करने की बात कही गई।
लखनऊ। प्रदेश में खाद की किल्लत की आशंकाओं को देखते हुए कृषि विभाग ने उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी अभियान तेज कर दिया है। विभाग की ओर से अब तक राज्यभर में 7364 छापेमारी की जा चुकी हैं। कार्रवाई के दौरान 136 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए, जबकि 35 लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। इसके अलावा 694 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 19 दुकानों को सील किया गया और 30 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। विभाग ने 266.60 टन उर्वरक का स्टॉक भी जब्त किया है।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने और इसके वितरण की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
मंगलवार को विधान भवन स्थित समिति कक्ष में आयोजित बैठक में कृषि मंत्री ने उर्वरक कंपनियों को भारत सरकार की ओर से जुलाई महीने के लिए निर्धारित मात्रा की पूरी आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई तक प्रदेश में कुल 15.98 लाख टन यूरिया, 5.02 लाख टन डीएपी, 4.93 लाख टन एनपीके, 3.63 लाख टन एसएसपी और 1.11 लाख टन एमओपी उपलब्ध है।
प्रतिदिन 1851 टन एनपीके की हो रही खपत
कृषि मंत्री ने बताया कि सहकारी और निजी क्षेत्र में उर्वरक का पर्याप्त भंडार मौजूद है। वर्तमान में प्रदेश में रोजाना औसतन 27,232 टन यूरिया, 6261 टन डीएपी और 1851 टन एनपीके की खपत हो रही है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी कृषि भूमि या बैनामा के अनुसार शत-प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री कराएं और उर्वरकों का अनावश्यक भंडारण न करें।
बैठक में प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र, प्रमुख सचिव सहकारिता अजय कुमार शुक्ला, सचिव कृषि इंद्र विक्रम सिंह, आयुक्त सहकारिता योगेश कुमार, निदेशक कृषि डॉ. पंकज त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
पशुओं के चारे की उपलब्धता पर भी हुई चर्चा
पशुओं के चारे की उपलब्धता को लेकर हुई बैठक में चंडीगढ़ विश्वविद्यालय उन्नाव (उत्तर प्रदेश) के विशेषज्ञों ने कृषि, पशुपालन और पर्यटन के एकीकृत विकास मॉडल का प्रस्तुतिकरण दिया।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह और पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने प्रस्तुतीकरण की समीक्षा के बाद इस दिशा में कार्य योजना तैयार करने की बात कही।
बैठक में अपर मुख्य सचिव पशुपालन मुकेश मेश्राम, महानिदेशक उपकार डॉ. संजय सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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