नोएडा एयरपोर्ट की शुरुआती रफ्तार उम्मीद से धीमी, 28.3 करोड़ का घाटा; सामने आई वजह

HIGHLIGHTS
- 2026 की पहली छमाही में एयरपोर्ट को 2.5 मिलियन स्विस फ्रैंक यानी करीब 29.5 करोड़ रुपये का राजस्व मिला।
- इसी अवधि में परिचालन खर्च 4.9 मिलियन स्विस फ्रैंक यानी करीब 57.9 करोड़ रुपये रहा।
- ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले 2.4 मिलियन स्विस फ्रैंक यानी करीब 28.3 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज हुआ।
- पश्चिम एशिया में तनाव और भूराजनीतिक अस्थिरता से अंतरराष्ट्रीय विमानन नेटवर्क प्रभावित हुए हैं।
जेवर (ग्रेटर नोएडा)। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की शुरुआत अनुमान के मुताबिक तेज नहीं रही है। परिचालन पर होने वाले खर्च की तुलना में एयरपोर्ट से प्राप्त राजस्व कम रहा। एयरपोर्ट का संचालन करने वाली ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी ने अपनी पहली छमाही की निवेश प्रस्तुति में मौजूदा भूराजनीतिक हालात को चुनौतीपूर्ण बताया है। कंपनी ने निकट अवधि में प्रदर्शन को लेकर अनिश्चितता बने रहने का अनुमान भी जताया है।
हालांकि, कंपनी का एयरपोर्ट के दीर्घकालिक विकास को लेकर भरोसा बरकरार है। ज्यूरिख एयरपोर्ट ने रूट नेटवर्क के लगातार विस्तार के साथ आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शुरू होने की उम्मीद भी जताई है।
नोएडा एयरपोर्ट पर 15 जून से व्यावसायिक परिचालन शुरू किया गया था। जून के शुरुआती 15 दिनों के दौरान एयरपोर्ट पर 204 फ्लाइट मूवमेंट हुए और करीब 25 हजार यात्रियों की आवाजाही दर्ज की गई। जुलाई में फ्लाइट मूवमेंट की संख्या बढ़कर 1,044 हो गई, जबकि यात्रियों की संख्या 77,204 पहुंच गई। इस तरह परिचालन में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन आपरेटर को अभी भी वृद्धि की रफ्तार अपेक्षाओं से कम रहने का अनुमान है। एयरपोर्ट का परिचालन ऐसे समय शुरू हुआ, जब वैश्विक विमानन क्षेत्र कई चुनौतियों से गुजर रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और भूराजनीतिक अस्थिरता के चलते कई एयरलाइनों को अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और उड़ानों के कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा है। पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद होने का असर भारत से पश्चिम दिशा में जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ा है। वहीं, एयर इंडिया एक्सप्रेस ने नोएडा एयरपोर्ट से प्रस्तावित परिचालन की शुरुआत नहीं की।
वर्तमान में 17 घरेलू रूट पर उड़ानें संचालित
ज्यूरिख एयरपोर्ट की प्रस्तुति के अनुसार, फिलहाल इंडिगो और अकासा एयर के जरिए नोएडा एयरपोर्ट से 17 घरेलू रूट पर उड़ानों का संचालन हो रहा है। आपरेटर के मुताबिक रूट नेटवर्क का विस्तार आगे भी जारी रहेगा। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय सेवाओं के शुरू होने की उम्मीद है। इससे संकेत मिलता है कि धीमी रफ्तार का अर्थ उड़ानों के विस्तार पर रोक लगना नहीं है, बल्कि विस्तार की गति अपेक्षा से कम है।
शुरुआती दौर में करीब 28.3 करोड़ रुपये का वित्तीय दबाव
नोएडा एयरपोर्ट के परिचालन के शुरुआती चरण में वित्तीय दबाव भी देखने को मिला है। ज्यूरिख एयरपोर्ट की निवेशक प्रस्तुति के मुताबिक 2026 की पहली छमाही में एयरपोर्ट से 2.5 मिलियन स्विस फ्रैंक यानी करीब 29.5 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। इसके मुकाबले परिचालन खर्च 4.9 मिलियन स्विस फ्रैंक यानी करीब 57.9 करोड़ रुपये रहा।
इस अवधि में ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले 2.4 मिलियन स्विस फ्रैंक यानी करीब 28.3 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया गया।
धीमे परिचालन का असर एयरपोर्ट आधारित कारोबार पर भी संभव
नोएडा एयरपोर्ट के शुरुआती परिचालन की धीमी रफ्तार का प्रभाव जेवर में एयरपोर्ट से जुड़े कारोबार के विस्तार पर भी पड़ सकता है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ टैक्सी, होटल, रेस्टोरेंट, पार्किंग, लाजिस्टिक्स और अन्य सेवाओं में रोजगार और कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में नए घरेलू रूट और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के विस्तार की गति जेवर के स्थानीय कारोबार के लिहाज से भी अहम होगी।
एयरपोर्ट की शुरुआती यात्री क्षमता सालाना 1.2 करोड़ है। वहीं, मास्टरप्लान के तहत भविष्य में इसे 70 मिलियन से अधिक यात्रियों की क्षमता तक विकसित करने का प्रावधान है। इसलिए मौजूदा चुनौती को दीर्घकालिक परियोजना पर संकट के तौर पर नहीं, बल्कि शुरुआती परिचालन चरण की गति से जोड़कर देखा जा रहा है। ज्यूरिख एयरपोर्ट ने भी भारतीय विमानन बाजार की दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर अपना मजबूत भरोसा कायम रखा है।
यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रा.लि. (यापल) ने बयान जारी कर कहा कि नए संचालित एयरपोर्ट के तौर पर उसका मुख्य ध्यान स्थिर और विश्वसनीय परिचालन बनाए रखने के साथ चरणबद्ध तरीके से हवाई संपर्क बढ़ाने पर है।
कंपनी के मुताबिक, वह अपने विमानन सहयोगियों के साथ लगातार मिलकर काम कर रही है, ताकि उनकी परिचालन योजनाओं और यात्रियों की मांग के अनुरूप उड़ानों के मार्गों का विस्तार किया जा सके। दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं और एयरपोर्ट को लेकर कंपनी का दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपरिवर्तित है।
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