पश्चिम बंगाल विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों ने ली शपथ, शुभेंदु ने नंदीग्राम सीट छोड़ी

HIGHLIGHTS
- पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को विधानसभा परिसर में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया देखने को मिली, जब नवनिर्वाचित विधायकों ने प्रोटेम स्पीकर तापस राय की मौजूदगी में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।
- इस अवसर पर पूरे सदन में औपचारिक माहौल के साथ-साथ राजनीतिक उत्साह भी देखने को मिला।
- शपथ ग्रहण से पहले विधायकों ने डॉ.
- भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद सभी सदस्यों को गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया।
- इस समारोह में भवानीपुर और नंदीग्राम सीट से विजयी हुए…
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को विधानसभा परिसर में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया देखने को मिली, जब नवनिर्वाचित विधायकों ने प्रोटेम स्पीकर तापस राय की मौजूदगी में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इस अवसर पर पूरे सदन में औपचारिक माहौल के साथ-साथ राजनीतिक उत्साह भी देखने को मिला। शपथ ग्रहण से पहले विधायकों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद सभी सदस्यों को गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया।
इस समारोह में भवानीपुर और नंदीग्राम सीट से विजयी हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी शपथ ली। दोनों सीटों पर उनकी जीत इस बार राज्य की राजनीति का प्रमुख केंद्र बनी रही।
2021 से 2026 तक का राजनीतिक घटनाक्रम
2021 विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला था, जहां तत्कालीन विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पराजित किया था। इसके बाद भवानीपुर उपचुनाव में ममता बनर्जी ने जीत हासिल कर विधानसभा में वापसी की थी। 2026 के चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटें फिर से राजनीतिक रूप से चर्चा में रहीं, जहां शुभेंदु अधिकारी ने दोनों क्षेत्रों से जीत दर्ज की।
भवानीपुर को चुना, नंदीग्राम छोड़ा
शपथ ग्रहण के बाद यह स्पष्ट हुआ कि शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट को अपने पास रखने का निर्णय लिया है, जबकि नंदीग्राम विधानसभा सीट को उन्होंने छोड़ दिया है। उनके इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
भव्य शपथ ग्रहण समारोह
विधानसभा भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने औपचारिक रूप से शपथ ली। प्रक्रिया के दौरान सदन का माहौल गंभीर और राजनीतिक रूप से सक्रिय बना रहा।
राजनीतिक असर की चर्चा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भवानीपुर और नंदीग्राम से जुड़े इस घटनाक्रम का प्रभाव आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीतिक रणनीति और सत्ता संतुलन पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.