अलीगढ़ को मिलेगी नई पहचान, 37 करोड़ की लागत से बनेगा दुनिया का पहला लॉक म्यूजियम

HIGHLIGHTS
- परियोजना के लिए शासन से प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है।
- प्रस्तावित स्थल जवाहर भवन के सामने राजा महेंद्र प्रताप पार्क के किनारे है।
- नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने स्थल का निरीक्षण किया।
अलीगढ़: ‘ताला और तालीम’ के लिए पहचाने जाने वाले अलीगढ़ को अब दुनिया के पहले लॉक म्यूजियम के नाम से नई पहचान मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत प्रदेश सरकार ने अलीगढ़ में लॉक म्यूजियम एवं अर्बन कल्चरल सेंटर के निर्माण के लिए प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दे दी है। परियोजना की कुल लागत 37 करोड़ रुपये है। शासन ने पहली किस्त के तौर पर 10.23 करोड़ रुपये की राशि भी जारी कर दी है।
प्रस्तावित लॉक म्यूजियम का स्थल जवाहर भवन के सामने राजा महेंद्र प्रताप पार्क के किनारे तय किया गया है। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने सिविल इंजीनियर और अर्बन प्लानर की टीम के साथ मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आगे की कार्रवाई जल्द पूरी करने के निर्देश दिए।
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में नगर निगम ने जून 2025 में इस परियोजना का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था। महापौर प्रशांत सिंघल, तत्कालीन मंडलायुक्त संगीता सिंह और नगर निगम के संयुक्त प्रयासों से तैयार प्रस्ताव को 30 सितंबर को जारी शासनादेश के तहत मंजूरी मिली।
परियोजना के लिए स्वीकृत 37 करोड़ रुपये में से 35 प्रतिशत राशि यानी 10 करोड़ 23 लाख 83 हजार 144 रुपये की पहली किस्त जारी की गई है।
प्राचीन तालों से साइबर लॉक तक का सफर दिखेगा
लॉक म्यूजियम में अलीगढ़ के करीब 100 साल पुराने ताला उद्योग की यात्रा को आधुनिक तकनीक के जरिए प्रदर्शित किया जाएगा। म्यूजियम में आकर्षक की-होल प्रवेश द्वार, विशाल लॉक स्कल्पचर और डिजिटल ओरिएंटेशन डोम तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा प्राचीन ताला निर्माण कार्यशाला के प्रतिरूप तथा औपनिवेशिक काल के व्यापार और निर्यात से जुड़ी प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
म्यूजियम में स्मार्ट लॉक, बायोमेट्रिक, फेस रिकॉग्निशन और साइबर सिक्योरिटी पर आधारित इंटरैक्टिव गैलरी भी विकसित की जाएगी। पारंपरिक कारीगरों की विरासत, उनकी जीवनगाथा और लोककथाओं को भी म्यूजियम में स्थान दिया जाएगा।
बच्चों के लिए यहां किड्स जोन और डिजिटल गतिविधियों की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही की-एनग्रेविंग स्टेशन, काइनेटिक लॉक स्कल्पचर, थीम आधारित कैफे और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। म्यूजियम को इतिहास, तकनीक, शिक्षा, मनोरंजन और पर्यटन के एकीकृत केंद्र के रूप में विकसित करने का उद्देश्य रखा गया है।
चार हजार करोड़ रुपये का है ताला उद्योग
नगर आयुक्त ने बताया कि अलीगढ़ का ताला उद्योग लगभग चार हजार करोड़ रुपये का है। लॉक म्यूजियम बनने के बाद देश-विदेश से आने वाले उद्यमियों और खरीदारों को अलीगढ़ के ताला उद्योग, उसके उत्पादों और तकनीक को एक ही स्थान पर देखने का अवसर मिलेगा।
हैरिसन, गोदरेज और लिंक लॉक जैसी कंपनियों के साथ संपर्क स्थापित कर उनके उत्पादों की गैलरी बनाने की भी योजना है। जेवर एयरपोर्ट से आने वाले अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए भी यह केंद्र उपयोगी साबित हो सकता है।
नगर आयुक्त के अनुसार, परियोजना की डीपीआर अनुभवी कंसल्टेंट से तैयार कराई जाएगी। बेहतर डिजाइन तय करने के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। अगले छह से सात माह में निर्माण शुरू होने की संभावना है।
उद्योग और रोजगार को मिलेगी नई दिशा
सांसद सतीश गौतम ने परियोजना को मंजूरी मिलने को अलीगढ़ की औद्योगिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
महापौर प्रशांत सिंघल ने कहा कि म्यूजियम के निर्माण से अलीगढ़ में देश-विदेश के पर्यटकों, व्यापारियों और विद्यार्थियों का आगमन बढ़ेगा। कोल विधायक अनिल पाराशर के मुताबिक, इससे पारंपरिक ताला उद्योग को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ नई पहचान मिलेगी।
तत्कालीन मंडलायुक्त संगीता सिंह ने भी परियोजना की स्वीकृति पर प्रसन्नता जताई और इसे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने वाली पहल बताया।
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