TMC के नाम-चुनाव चिह्न पर रोक, ऋतब्रत बनर्जी बोले- राजनीतिक पार्टी प्राइवेट कंपनी नहीं

HIGHLIGHTS
- आयोग के फैसले की जानकारी नेताओं को अचानक मिली।
- दोनों गुट खुद को पार्टी का प्रतिनिधि बता रहे हैं।
- विवाद में 1968 के चुनाव चिह्न आदेश का पैरा 15 लागू होगा।
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश पर पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि इस आदेश से स्पष्ट हो गया है कि राजनीतिक दलों को निजी संस्थाओं की तरह नहीं देखा जा सकता और न ही उन्हें वंशवादी उत्तराधिकार के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है।
बनर्जी ने क्या कहा?
पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि आयोग के फैसले की जानकारी मिलने से पार्टी नेताओं को हैरानी हुई। उन्होंने कहा, "प्लेन से उतरते ही हमें पता चला कि सिंबल और नाम को फ्रीज कर दिया गया है। हालांकि, एक बात साफ है लोकतंत्र में तानाशाही के लिए कोई जगह नहीं है।"
'राजनीतिक पार्टी प्राइवेट कंपनी नहीं होती'
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश से यह साबित हो गया है कि परिवारवादी राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, "खासकर उस कहानी को देखते हुए जो चुनाव चिह्न और नाम को लेकर चल रही थी। कोई राजनीतिक पार्टी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं होती और न ही किसी राजनीतिक पार्टी का कोई वारिस हो सकता है। आज यह बात साबित हो गई है।"
उनकी यह टिप्पणी चुनाव आयोग द्वारा ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद आई है। आयोग ने विवाद का समाधान होने तक दोनों विरोधी गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न चुनने का निर्देश दिया है।
आयोग के इस फैसले का पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा उपचुनावों पर भी असर पड़ेगा। चुनाव आयोग ने नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव कराने की घोषणा की थी।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध जानकारी पर विचार करने के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस में दो विरोधी गुट हैं। दोनों ही खुद को पार्टी का प्रतिनिधि बता रहे हैं।
आदेश में क्या है?
चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक, रिकॉर्ड में मौजूद सभी जानकारियों पर विचार करने के बाद आयोग का मानना है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस में दो विरोधी गुट हैं। एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी और दूसरे का नेतृत्व अरूप रॉय कर रहे हैं।
आदेश में कहा गया कि दोनों गुट खुद को ही पार्टी बता रहे हैं। ऐसे में चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत आयोग को इस मामले में ठोस फैसला लेने की जरूरत है।
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