TMC के नाम और सिंबल पर EC की रोक, कांग्रेस बोलीं- पीएम मोदी को मिला ‘जन्मदिन का तोहफा’

HIGHLIGHTS
- दोनों गुटों से नए नाम और चुनाव चिह्न बताने को कहा गया।
- आयोग ने 1968 के चुनाव चिह्न आदेश का हवाला दिया।
- अंतरिम व्यवस्था अंतिम फैसले तक लागू रहेगी।
कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्वाचन आयोग के अंतरिम आदेश की आलोचना की है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह फैसला निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘देर रात जन्मदिन का तोहफा’ है।
निर्वाचन आयोग ने क्या आदेश दिया?
निर्वाचन आयोग ने टीएमसी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनाव के दौरान पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया है। दोनों गुटों से अपनी पसंद के नाम और चुनाव चिह्न बताने को कहा गया है। गुरुवार रात जारी अंतरिम आदेश में आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि मामले में चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत विस्तृत फैसला जरूरी है।
आयोग के आदेश के मुताबिक, ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों समूहों में से किसी को भी ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। दोनों गुटों को पार्टी के लिए आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से भी रोका गया है। यह अंतरिम व्यवस्था विवाद पर अंतिम फैसला होने तक लागू रहेगी।
कांग्रेस ने इसे पीएम को ‘जन्मदिन का तोहफा’ बताया
कांग्रेस महासचिव और संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि एआईटीसी के नाम और चुनाव चिह्न को रोकना मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देर रात जन्मदिन का तोहफा है।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में भाजपा के खिलाफ लड़ने वालों को अब उनके खिलाफ बगावत करने और निर्वाचन आयोग की मदद से दल-बदल करने का मौका दिया जा रहा है।
केसी वेणुगोपाल ने लगाए ये आरोप
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने एक बार फिर खुद को ‘भाजपा के हाथों की कठपुतली’ और ‘लोकतंत्र को धीरे-धीरे नष्ट करने का औजार’ साबित किया है। उन्होंने कहा कि शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब एआईटीसी के मामले में ऐसा किया गया है।
उन्होंने कहा कि जो भी भाजपा का विरोध करता है, उसे करारा झटका दिया जाता है और उसका पूरा चुनावी अस्तित्व छीन लिया जाता है। वेणुगोपाल ने इस कदम की निंदा करते हुए निर्वाचन आयोग से ममता बनर्जी को ‘दो पत्तियों’ वाला चुनाव चिह्न बहाल करने की मांग की।
पवन खेड़ा ने भी आयोग के फैसले पर उठाए सवाल
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि एआईटीसी के चुनाव चिह्न को रोकने का निर्वाचन आयोग का फैसला ‘न्याय’ नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इसे आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे हटना बताया।
खेड़ा ने दावा किया कि एआईटीसी से अलग हुए गुट का कोई संवैधानिक आधार नहीं है और इसलिए एआईटीसी के चुनाव चिह्न पर उसका कोई वैध दावा नहीं है। उनके मुताबिक, चुनाव चिह्न उस पार्टी का है, जो उसका नाम धारण करती है।
उपचुनाव को लेकर आयोग की अंतरिम व्यवस्था
निर्वाचन आयोग ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद उसे अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी समूह दिखाई देते हैं। दोनों समूह खुद को पार्टी बता रहे हैं। ऐसे में चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत विवाद पर विस्तृत फैसला जरूरी है।
आयोग ने दोनों समूहों को समान स्थिति में रखने और उनके अधिकारों व हितों की रक्षा के लिए अंतरिम आदेश जारी किया है। यह व्यवस्था विवाद पर अंतिम निर्णय आने तक प्रभावी रहेगी।
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