मुजफ्फरनगर में भाकियू की पंचायत, राकेश टिकैत ने उठाईं किसानों की 16 सूत्रीय मांगें

HIGHLIGHTS
- गन्ने के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग।
- चीनी मिलों से बकाया भुगतान जल्द दिलाने पर जोर।
- कृषि नलकूपों को निर्बाध बिजली देने की मांग।
मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में बुधवार रात भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की महत्वपूर्ण पंचायत आयोजित की जा रही है। यह पंचायत सुबह तक चलेगी। पंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर 16 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से रखा।
फसलों के लाभकारी मूल्य और खरीद व्यवस्था की मांग
राकेश टिकैत ने किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य दिलाने और प्रभावी खरीद व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी प्रमुख फसलों की सरकारी खरीद व्यवस्था को मजबूत किया जाए और खरीद केंद्रों पर पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
गन्ने के लाभकारी मूल्य के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग उठाई गई। साथ ही चीनी मिलों पर किसानों के बकाया भुगतान को तत्काल दिलाने की बात कही गई।
बिजली और खाद की समस्या पर जोर
कृषि नलकूपों को पर्याप्त और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने की मांग करते हुए बिजली की समस्या का स्थायी समाधान करने की बात कही गई। ग्रामीण क्षेत्रों में वोल्टेज की समस्या, बार-बार ट्रिपिंग और अनियमित विद्युत आपूर्ति को दूर करने पर भी जोर दिया गया।
खाद की उपलब्धता को लेकर कहा गया कि बुवाई के समय किसानों को खाद के लिए घंटों कतार में न लगना पड़े। डीएपी, यूरिया और अन्य जरूरी कृषि आदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कालाबाजारी और जमाखोरी पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई।
आवारा पशुओं और प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान
आवारा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान पर चिंता जताते हुए ग्राम स्तर पर प्रभावी व्यवस्था बनाकर समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की गई। इसके साथ ही गौशालाओं के संचालन की नियमित निगरानी की बात कही गई।
बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, सूखा और आंधी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को हुए नुकसान का तत्काल मुआवजा देने की मांग की गई। फसल बीमा योजना को सरल और पारदर्शी बनाने तथा वास्तविक नुकसान के आधार पर निर्धारित समय में बीमा राशि का भुगतान सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने की मांग
किसानों के लिए सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नहरों की समय पर सफाई और टेल तक पानी पहुंचाने की मांग की गई। बंद पड़े सरकारी नलकूपों को तत्काल शुरू कराने और सिंचाई के लिए किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की बात कही गई।
कृषि ऋण से जुड़ी समस्याओं में राहत की मांग करते हुए छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऋण पुनर्गठन और प्रभावी राहत व्यवस्था की बात कही गई। किसानों के खिलाफ कठोर वसूली की कार्रवाई से पहले उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखने का आग्रह किया गया।
मंडियों में पारदर्शी तौल और समय पर भुगतान
मंडियों में किसानों के शोषण को रोकने के लिए पारदर्शी तौल, उचित मूल्य और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। किसानों की उपज औने-पौने दामों पर खरीदने वाले बिचौलियों और अनियमितताओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की बात कही गई।
किसानों और कृषि मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने की मांग भी उठाई गई। इसमें कृषि कार्य के दौरान दुर्घटना में मृत्यु या गंभीर चोट की स्थिति में प्रभावित परिवारों को जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग शामिल है।
भूमि अधिग्रहण में किसानों के हितों की रक्षा
विकास परियोजनाओं के लिए कृषि भूमि के अधिग्रहण के दौरान किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की गई। उचित और पारदर्शी मुआवजा देने के साथ प्रभावित किसानों की सहमति, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े प्रावधानों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने की बात कही गई।
किसान आंदोलनों और किसानों से जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष समीक्षा तथा उचित मामलों में मुकदमे वापस लेने की कार्रवाई की मांग की गई। शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले किसानों का अनावश्यक उत्पीड़न नहीं करने पर भी जोर दिया गया।
कृषि लागत कम करने की मांग
कृषि क्षेत्र में बढ़ रही लागत को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई। इसमें डीजल, बिजली, खाद, बीज, कीटनाशक और कृषि मशीनरी जैसी लागत शामिल हैं, ताकि किसानों की वास्तविक आय पर बढ़ते लागत भार को कम किया जा सके।
प्रदेश सरकार से किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठक करने की मांग भी की गई। साथ ही किसानों से जुड़े नीतिगत फैसलों से पहले उनके साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं और सुझावों को शामिल करने की बात कही गई।
सोनाली नदी पर बांध और पुरकाजी को तहसील बनाने की मांग
मुजफ्फरनगर के डूब क्षेत्र खादर में सोनाली नदी पर बांध बनाने की मांग की गई। इसके अलावा पुरकाजी को तहसील का दर्जा देने की मांग भी उठाई गई। कहा गया कि हर साल जलभराव के कारण बाढ़ की स्थिति बनती है, जिससे दर्जनों गांवों की हजारों हेक्टेयर भूमि डूब जाती है और किसानों को भारी नुकसान होता है।
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