दिल्ली इमारत हादसा: बुजुर्ग के सामने भरभराकर गिरी बिल्डिंग, 21 सेकंड का CCTV आया सामने

HIGHLIGHTS
- हादसे के बाद मौके पर NDRF और CATS की टीमें पहुंचीं।
- मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- हादसे वाली गली में जर्जर इमारतों को एमसीडी ने नोटिस जारी किए थे।
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत ढहने से पूरी राजधानी में हड़कंप मच गया। इस इमारत का इस्तेमाल पीजी के तौर पर किया जा रहा था। रविवार को अचानक यह इमारत ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर गई। हादसे का रोंगटे खड़े कर देने वाला सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। इसमें दिखाई दे रहा है कि इमारत के ठीक नीचे एक बुजुर्ग अपने छोटे ठेले के साथ बैठे थे। तभी अचानक ऊपर से मलबा गिरने लगा और चारों तरफ धूल का गुबार फैल गया।
खतरा महसूस होते ही बुजुर्ग अपनी जान बचाने के लिए तेजी से वहां से दूर भागे। इसके कुछ सेकंड बाद ही पूरी इमारत जमींदोज हो गई। हादसे के बाद चारों ओर धूल का गुबार छा गया। मोती बाग स्थित सत्य निकेतन इमारत हादसे में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
फंसे लोगों को बचाने का काम जारी
मलबे में अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है, जिनमें कई छात्र भी शामिल हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), CATS एम्बुलेंस और प्रशासन की कई टीमें मौके पर मौजूद हैं। बड़े स्तर पर बचाव अभियान जारी है। टीमें अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास कर रही हैं। इस घटना ने पूरी राजधानी को झकझोर दिया है।
मृतकों की संख्या हुई छह
दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
11 लोगों को रेस्क्यू किया गया
मिली जानकारी के अनुसार, हादसे के बाद अब तक 11 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। जिन लोगों के अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका है, उनकी तलाश की जा रही है।
एमसीडी ने हादसे वाली गली में जर्जर इमारतों को नोटिस जारी किया
इसी बीच एमसीडी ने उस गली में जर्जर हालत वाली इमारतों को नोटिस जारी किया है, जहां यह बिल्डिंग गिरी थी। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के मुताबिक, ढही हुई इमारत की पहचान पी-14, सत्य निकेतन के रूप में की गई है।
यह इमारत एक पुनर्वास कॉलोनी का हिस्सा है और इसका क्षेत्रफल करीब 55 वर्ग गज है। प्रॉपर्टी में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और चौथी मंजिल तक के फ्लोर हैं। बताया गया है कि यह इमारत 1990 के दशक में बनी थी।
एमसीडी के अनुसार, इस प्रॉपर्टी की बुकिंग या सीलिंग से संबंधित कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा प्रॉपर्टी में किए गए किसी भी काम को लेकर कोई शिकायत भी प्राप्त नहीं हुई थी।
चार मंजिल से अधिक वाले सभी अवैध निर्माण तत्काल सील किए जाएंगे: दिल्ली मेयर
घटना के संबंध में बीती शाम दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने बयान दिया था। मेयर ने कहा था, "सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। चार मंजिल से अधिक वाले सभी अवैध निर्माणों को तत्काल सील किया जाएगा और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल बर्खास्त किया जाएगा। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए जाएंगे।"
सीएम रेखा गुप्ता ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही भवन मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इस गंभीर घटना के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसकी पूरी जवाबदेही तय की जाएगी और उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मोती बाग के पीजी खाली कराए गए
कार्रवाई के डर से संचालकों ने हटाए बोर्ड, छात्रों के सामने रहने का संकट
नई दिल्ली। सत्य निकेतन में रविवार को इमारत गिरने की घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के कई पीजी खाली करा दिए। हादसा स्थल से सटे पीजी में रहने वाले छात्रों को राहत और बचाव अभियान के दौरान किसी अनहोनी से बचाने के लिए तत्काल बाहर निकलने को कहा गया।
कार्रवाई के डर से कुछ पीजी संचालकों ने अपने मकानों के बाहर लगे बोर्ड भी हटा दिए, ताकि वहां पीजी संचालित होने की पहचान न हो सके।
पीजी खाली कराने की कार्रवाई के बाद छात्रों और नौकरीपेशा युवाओं में अफरातफरी का माहौल बन गया। अचानक कमरे खाली करने के निर्देश मिलने पर कई छात्र अपना सामान लेकर बाहर निकल आए। उनका कहना है कि वे पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में सत्य निकेतन और आसपास के इलाके में रहते हैं। ऐसे में तुरंत दूसरी जगह कमरा तलाशना उनके लिए मुश्किल है।
हालांकि, दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने नजदीकी कॉलेज में छात्रों के अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की है। कॉलेज प्रशासन के मुताबिक, जब तक उनके लिए दूसरी व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक छात्र वहां रह सकते हैं।
इधर, सड़क पर आए छात्रों की मदद के लिए छात्र संगठनों ने शाम को लंगर भी लगाया। इससे प्रभावित छात्रों को भोजन उपलब्ध कराया गया। स्थानीय लोगों ने हादसे के बाद आसपास के पुराने और जर्जर भवनों की व्यापक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते खतरनाक इमारतों की पहचान कर उन्हें खाली कराया जाए तो बड़े हादसों को रोका जा सकता है।
बड़ा सवाल: पीजी में सुरक्षा की जांच कौन करता है
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में मौजूद उन सैकड़ों पीजी और किराये के कमरों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां छात्रों से हर महीने हजारों रुपये लिए जा रहे हैं। क्या इन इमारतों की नियमित जांच होती है? क्या उनकी संरचनात्मक मजबूती का रिकॉर्ड देखा जाता है? क्या एक कमरे में तय क्षमता से अधिक छात्रों को रखने पर कार्रवाई होती है? फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकास की व्यवस्था है या नहीं? आपदा के समय छात्र सुरक्षित बाहर निकल सकते हैं या नहीं? इन सवालों का जवाब कौन देगा?
राजेंद्र नगर हादसे के बाद भी नहीं चेते जिम्मेदार
जुलाई 2024 में हुए राजेंद्र नगर कोचिंग बेसमेंट हादसे के बाद पीजी, कोचिंग संस्थानों और बेसमेंट की सुरक्षा व्यवस्था सुधारने को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार ने कई घोषणाएं की थीं। इसके बावजूद दो साल बाद भी पीजी के लिए अलग और एकीकृत फायर एवं स्ट्रक्चरल सेफ्टी कोड लागू नहीं हो सका है।
पीजी की वैधता और सुरक्षा अलग-अलग भवन उपनियमों, मास्टर प्लान, अग्निशमन नियमों और स्थानीय निकायों की मंजूरियों में बंटी हुई है। डीडीए अभी यूबीबीएल-2016 को भवन अनुमोदन का आधार बता रहा है, जबकि दिल्ली फायर सेवा फायर सेफ्टी नियम, 2010 और उनके 2025 के संशोधनों के तहत काम कर रही है।
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