दिल्ली PG हादसे में बड़ा खुलासा: रेंट एग्रीमेंट में लिखा था- हादसा हुआ तो छात्र खुद जिम्मेदार

HIGHLIGHTS
- हादसे के बाद एमसीडी और पुलिस की जांच में कई बिंदु सामने आए।
- 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी हादसे वाली इमारत।
- बेसमेंट में चल रहा निर्माण अनधिकृत बताया गया है।
दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत के बाद हादसे की वजह और जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। शुरुआती जांच में इमारत के निर्माण, उसमें किए गए बदलाव और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल सामने आए हैं। स्थानीय लोगों ने भी क्षेत्र में इमारतों की स्थिति और निर्माण गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। वहीं, एमसीडी और पुलिस की जांच में भी कुछ गंभीर बातें सामने आई हैं।
रेंट एग्रीमेंट में ऐसी शर्तें, हादसे की स्थिति में छात्र खुद जिम्मेदार
पीजी संचालक रेंट एग्रीमेंट में कई ऐसी बारीक शर्तें शामिल कर देते हैं, जिनके चलते किसी हादसे या घटना की स्थिति में उनकी जिम्मेदारी से बचने की गुंजाइश बनी रहे। कुछ इसी तरह का एग्रीमेंट 'हास्टल डेज' में रहने वाले छात्रों ने भी किया था। सोमवार को इंटरनेट मीडिया पर भी ऐसा ही एक रेंट एग्रीमेंट तेजी से प्रसारित होता रहा। दरअसल, परेशानियों के बावजूद रहने की मजबूरी के कारण ज्यादातर जगहों पर छात्र इसी तरह के एकतरफा एग्रीमेंट में फंस जाते हैं।
रेंट एग्रीमेंट में दी गई चेतावनी
प्रसारित रेंट एग्रीमेंट में किराएदार की जिम्मेदारियों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसमें तीन महीने की सिक्योरिटी और एक महीने का एडवांस किराया देने की बात कही गई है। साथ ही लिखा है कि एग्रीमेंट की अवधि पूरी होने से पहले किसी भी स्थिति में सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस नहीं किया जाएगा। यह भी चेतावनी दी गई है कि फर्नीचर या फिक्स्चर को होने वाले किसी भी नुकसान की भरपाई इसी डिपाजिट से की जाएगी।
हादसा होने पर छात्र को ही बताया गया जिम्मेदार
एग्रीमेंट की बारीक शर्तों में यह भी लिखा है कि पीजी प्रशासन छात्र के साथ होने वाली किसी भी दुर्घटना या जोखिम के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। एग्रीमेंट में छात्रों को दीवारों पर पोस्टर या स्टिकर लगाने से भी मना किया गया है। इसके अलावा, अगर कोई छात्र तय समय से पहले किसी भी वजह से हॉस्टल छोड़ता है, तो हॉस्टल फीस या सिक्योरिटी मनी वापस नहीं की जाएगी।
मंदिर में इधर-उधर घूम रहा था इमारत का मालिक
इमारत का मालिक हरीराम गुप्ता भिवाड़ी में मंदिर में इधर-उधर घूमता रहा। वह दिल्ली से अपनी पत्नी और बेटे के साथ फरार हुए। उनकी पत्नी और बेटा गुरुग्राम में ही रहे, जबकि वह भिवाड़ी चले गए। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह वकील की तलाश में घूम रहे थे। पूछताछ के दौरान उन्होंने अपनी गलतियां स्वीकार की हैं।
इमारत में दरार, सीलन और पानी जमा होने की समस्या
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बेसमेंट में पानी जमा रहता था और वहां काम भी चल रहा था। क्षेत्र में पानी भरने और इमारतों की नियमित जांच नहीं होने को लेकर पहले से शिकायतें थीं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मरम्मत शुरू करने से पहले इमारत की संरचनात्मक स्थिति की जांच की गई थी या नहीं। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि मरम्मत के दौरान किसी भार उठाने वाले हिस्से में कोई बदलाव किया गया था या नहीं।
सवाल यह है कि अगर इमारत में दरार, सीलन और पानी जमा होने जैसी समस्याएं थीं, तो मरम्मत शुरू करने से पहले क्या किसी सक्षम इंजीनियर से उसकी स्ट्रक्चरल जांच कराई गई थी?
बेसमेंट में किया गया निर्माण अनधिकृत
घटना की चश्मदीद स्वाति ने बताया कि गिरी हुई इमारत के बेसमेंट में काम चल रहा था। एक वरिष्ठ एमसीडी अधिकारी के मुताबिक, इस इमारत का कोई मंजूर बिल्डिंग प्लान रिकॉर्ड में नहीं मिला है। एमसीडी के अनुसार, करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी इस इमारत में बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर के ऊपर चार मंजिलें थीं। बेसमेंट में किया गया निर्माण अनधिकृत था।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि करीब दो साल पहले इमारत में दो अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि ये मंजिलें कब और किस तरह बनाई गईं और क्या इनके लिए अनुमति ली गई थी। ऐसे में सवाल है कि निर्माण या बाद में किए गए बदलाव मंजूर थे या नहीं?
पिछले साल एक संस्था को लीज पर दी गई थी इमारत
हादसे वाली इमारत 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी और बाद में इसे पीजी में बदल दिया गया। पिछले साल यह इमारत एक संस्था को लीज पर दी गई थी और इसका इस्तेमाल छात्रों के रहने के लिए किया जा रहा था। पुलिस जांच कर रही है कि पीजी संचालित करने के लिए जरूरी अनुमति थी या नहीं और क्या इमारत सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती थी।
सवाल यह भी है कि क्या इस इमारत को बड़ी संख्या में छात्रों के रहने वाले पीजी के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति थी? क्या वहां रहने वालों की संख्या के हिसाब से सीढ़ियां, निकासी के रास्ते और अन्य जरूरी सुविधाएं पर्याप्त थीं?
इमारत के पास फायर एनओसी नहीं थी
क्या इमारत में आपात स्थिति से निपटने के पर्याप्त इंतजाम थे? स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि रिहायशी इलाकों में इमारतों को पीजी के तौर पर संचालित करने की अनुमति क्यों दी गई। हादसे के बाद इमारत के आपात निकास को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। इमारत में दूसरा निकास नहीं था, जिसके कारण किसी आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकलने में परेशानी हो सकती थी।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पीजी चलाने के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। एक वरिष्ठ एमसीडी अधिकारी के हवाले से बताया गया कि इमारत के पास फायर एनओसी नहीं थी। ऐसे में सवाल है कि अगर वहां इतनी बड़ी संख्या में छात्र रह रहे थे, तो आग या किसी अन्य आपात स्थिति में सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं?
इलाके में पहले भी गिर चुकी हैं इमारतें
अगर इलाके में पहले से इस तरह की समस्याएं मौजूद थीं, तो एमसीडी को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? हादसे के बाद यह सवाल सबसे गंभीर सवालों में शामिल हो गया है। कई वीडियोज में स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि इस इलाके में पहले भी बिल्डिंग गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं।
जब स्थानीय लोग इमारतों की स्थिति को लेकर सवाल उठा रहे थे, तो क्या एमसीडी ने ऐसे इलाकों की इमारतों का व्यवस्थित सुरक्षा सर्वे कराया था? अगर निर्माण नियमों का उल्लंघन हो रहा था, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया?
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.