मुंबई में कैप्टन स्मित के सम्मान में लगे बिलबोर्ड, इस्राइली दूत ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान की कही बात

HIGHLIGHTS
- मुंबई में कैप्टन स्मित के सम्मान में बड़े बिलबोर्ड लगाए गए
- इस्राइल सरकार और लोगों की ओर से आभार जताने के लिए अभियान शुरू किया गया
- कैप्टन स्मित के हाथ और गर्दन पर गंभीर चोटें लगी थीं
इस्राइल के महावाणिज्यदूत (मध्य पश्चिम भारत) याविन रेवाच ने कैप्टन स्मित की बहादुरी की सराहना की है। उन्होंने बताया कि मुंबई में बिलबोर्ड लगाकर कैप्टन स्मित के साहस के लिए उन्हें सम्मान दिया गया। रेवाच ने कहा कि गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन ने इस्राइली यात्रियों की जान बचाई और हाईजैक की कोशिश को नाकाम किया। उनके मुताबिक, कैप्टन स्मित की बहादुरी के लिए उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाना चाहिए।
महावाणिज्यदूत याविन रेवाच ने कहा कि इस्राइल सरकार और वहां के लोगों की ओर से कैप्टन स्मित की असाधारण बहादुरी के लिए उन्हें दिल से धन्यवाद देना और सम्मानित करना जरूरी था। इसी वजह से मुंबई में अलग-अलग स्थानों और बड़े-बड़े बिलबोर्ड पर जन-जागरूकता अभियान शुरू करने का फैसला किया गया, ताकि उनकी बहादुरी के लिए व्यक्तिगत रूप से आभार जताया जा सके।
रेवाच के अनुसार, कैप्टन स्मित के हाथ और गर्दन गंभीर रूप से घायल थे। इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोला और इस्राइली यात्रियों को अंदर जाने दिया। इसके बाद उन्होंने ओमान के उस हमलावर को काबू में किया, जिसे ‘आतंकवादी’ बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से कैप्टन की बहादुरी को सम्मानित करना जरूरी था।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले उन्हें ओमान, यूएई और अमीराती अधिकारियों पर भरोसा है कि वे पूरे मामले की गहराई से जांच करेंगे और पता लगाएंगे कि वास्तव में क्या हुआ था। रेवाच के मुताबिक, सामने आए सबूतों से यह स्पष्ट होता है कि ओमानी पायलट ने कथित तौर पर आतंकी कार्रवाई करने, विमान को हाईजैक करने और उसमें सवार सभी यात्रियों के साथ विमान को क्रैश करने की कोशिश की।
रेवाच ने कहा कि कैप्टन स्मित ने जो किया, वह बहादुरी और साहस का उदाहरण है। उन्होंने दोहराया कि गर्दन और हाथों में गंभीर चोट के बावजूद कैप्टन रेंगते हुए आगे बढ़े, कॉकपिट खोला और इस्राइली यात्रियों को अंदर मौजूद आतंकवादी पर काबू पाने का मौका दिया।
उन्होंने कहा कि फिलहाल सबसे पहले कैप्टन स्मित के ठीक होने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनकी उम्मीद है कि कैप्टन पूरी तरह स्वस्थ हों और सुरक्षित अपने घर भारत लौटें। इसके बाद उनकी बहादुरी के लिए उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाना उचित होगा।
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