भारतीय नौसेना को मिलेगी नई ताकत, जीआरएसई ने युद्धपोत ‘श्रेयस’ का किया जलावतरण

HIGHLIGHTS
- जीआरएसई ने कोलकाता के राजाबगान डकयार्ड में ‘श्रेयस’ का जलावतरण किया।
- यह भारतीय नौसेना के लिए बनाई जा रही चार पोतों की शृंखला का तीसरा युद्धपोत है।
- पोत की लंबाई करीब 113 मीटर, चौड़ाई 14.6 मीटर और वजन लगभग 3,000 टन है।
कोलकाता। भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में कोलकाता स्थित गार्डनरीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने शनिवार को अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत (एनजीओपीवी) ‘श्रेयस’ का जलावतरण किया।
‘श्रेयस’ भारतीय नौसेना के लिए जीआरएसई की ओर से बनाए जा रहे चार पोतों की शृंखला का तीसरा युद्धपोत है। रक्षा मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जीआरएसई ने पांच महीने से भी कम समय में इस शृंखला के तीन पोतों का जलावतरण कर परियोजना में तेजी दिखाई है।
कोलकाता स्थित जीआरएसई के राजाबगान डकयार्ड में आयोजित समारोह में भारतीय नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनकी पत्नी रेयमान कोचर ने पारंपरिक रीति से पोत का जलावतरण किया और उसका नामकरण किया।
समारोह में जीआरएसई और भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। जलावतरण के बाद पोत को समुद्र में विभिन्न परीक्षणों से गुजरना होगा। इसमें अत्याधुनिक सेंसर और अन्य उपकरण लगाए जाएंगे। परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे भारतीय नौसेना को सौंप दिया जाएगा।
113 मीटर लंबा और 3,000 टन वजनी है युद्धपोत
अधिकारियों के मुताबिक, ‘श्रेयस’ की लंबाई करीब 113 मीटर और चौड़ाई 14.6 मीटर है। इसका वजन लगभग 3,000 टन है और यह अधिकतम 23 नॉट की गति से चल सकता है। वहीं, 14 नॉट की परिभ्रमण गति पर इसकी परिचालन क्षमता 8,500 समुद्री मील तक होगी।
पहले बनाए गए अपतटीय गश्ती पोतों के मुकाबले नई पीढ़ी के ये पोत आकार और क्षमताओं के लिहाज से अधिक उन्नत हैं। इनमें बेहतर सहनशक्ति, मारक क्षमता और विभिन्न तरह के अभियानों को पूरा करने की क्षमता होगी।
इन युद्धपोतों का इस्तेमाल तटीय और अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा, समुद्री निगरानी, संदिग्ध जहाजों को रोकने और उनकी तलाशी लेने, समुद्री खदानों से जुड़े अभियानों तथा विशेष अभियानों में किया जाएगा। इसके अलावा, समुद्री डकैती के खिलाफ कार्रवाई, घुसपैठ रोकने, मानवीय सहायता, आपदा राहत, खोज एवं बचाव अभियानों और जरूरत पड़ने पर अस्पताल संबंधी सेवाओं के लिए भी इनका उपयोग किया जा सकेगा।
जीआरएसई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) कमोडोर पीआर हरि ने कहा कि नई पीढ़ी के ये पोत आकार, समुद्र में लंबे समय तक अभियान चलाने की क्षमता, विस्थापन तथा उपकरणों और हथियारों के मामले में पहले के अपतटीय गश्ती पोतों से अधिक उन्नत हैं।
इस शृंखला के पहले पोत ‘संघमित्रा’ का जलावतरण 20 मई 2026 को हुआ था, जबकि दूसरे पोत ‘श्रुति’ का जलावतरण 11 अगस्त 2026 को किया गया था। ‘श्रेयस’ के जलावतरण के साथ जीआरएसई ने भारतीय नौसेना के 11 पोतों वाले एनजीओपीवी कार्यक्रम के तहत अपने चार पोतों की परियोजना में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है।
तीसरे पोत के जलावतरण पर वाइस एडमिरल ने की जीआरएसई की सराहना
समारोह के दौरान वाइस एडमिरल अजय कोचर ने पांच महीने से कम समय में तीसरे पोत के जलावतरण पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि जीआरएसई में चौबीसों घंटे किए जा रहे प्रयासों के साथ भारतीय युद्धपोत निर्माण व्यवस्था की बढ़ती गति, क्षमता और मजबूती को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे समुद्री राष्ट्र के लिए क्षेत्र में लगातार और विश्वसनीय समुद्री उपस्थिति बनाए रखना जरूरी है। देश की लंबी तटरेखा, विशाल विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और समुद्र पर निर्भर आर्थिक व ऊर्जा हितों को देखते हुए ऐसे पोतों का महत्व और बढ़ जाता है।
















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