मुजफ्फरनगर में जमीयत का सद्भावना सम्मेलन, धर्मगुरुओं ने दिया भाईचारे का संदेश

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के पांचवें सद्भावना सम्मेलन में सामाजिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का संदेश दिया गया।
- सम्मेलन में विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने शांति, प्रेम और आपसी विश्वास बनाए रखने की अपील की।
- सद्भावना अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और गांव-गांव में सद्भावना मंच समितियां बनाने की बात कही गई।
मुजफ्फरनगर में रविवार दोपहर करीब 2 बजे से शाम 4 बजे तक जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से आयोजित पांचवें सद्भावना सम्मेलन में सामाजिक एकता, भाईचारे और राष्ट्रीय सौहार्द का संदेश दिया गया। इस कार्यक्रम में अलग-अलग धर्मों के धर्मगुरु, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
सम्मेलन के दौरान "हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई... आपस में हैं सब भाई-भाई" जैसे नारों के बीच वक्ताओं ने समाज में शांति, प्रेम और आपसी विश्वास बनाए रखने की अपील की।
कार्यक्रम के आयोजक और जमीयत उलेमा-ए-हिंद मुजफ्फरनगर के सदर कारी जाकिर हुसैन ने बताया कि संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के आह्वान पर देशभर में एक हजार से अधिक सद्भावना सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इसी अभियान के तहत मुजफ्फरनगर में भी यह सम्मेलन आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, संविधान की भावना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।
कारी जाकिर हुसैन ने कहा कि मौजूदा समय में समाज को जोड़ने की जरूरत पहले से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अफवाहें, नफरत और आपसी दूरी देश के लिए नुकसानदायक हैं। इसलिए सभी लोगों को प्रेम, भाईचारे और विश्वास का माहौल बनाने में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि सद्भावना अभियान को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा गया है। इसके तहत वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है, जिससे सामाजिक एकता के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया जा सके।
कारी जाकिर हुसैन ने कहा कि आने वाले समय में देश के हर राज्य, शहर और गांव में सद्भावना मंच समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों में सभी धर्मों और वर्गों के लोगों को शामिल किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर संवाद कायम कर सामाजिक सौहार्द को मजबूत किया जा सके।
कार्यक्रम में आगामी कांवड़ यात्रा का भी जिक्र किया गया। वक्ताओं ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी कांवड़ यात्रा शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो, यही सभी की इच्छा है। उन्होंने श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और प्रशासन से आपसी सहयोग बनाए रखने तथा किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की।
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