नीट यूजी आंदोलन पर बिहार सरकार का बड़ा फैसला, आंदोलनकारियों पर दर्ज केस होंगे वापस

HIGHLIGHTS
- बिहार सरकार ने नीट यूजी आंदोलन से जुड़े लोगों पर दर्ज केस, परिवाद और नोटिस वापस लेने का फैसला किया।
- गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए आंदोलनकारियों की रिहाई की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
- आंदोलन के दौरान हिंसा में 91 पुलिसकर्मी घायल हुए थे, अब सरकार के फैसले से प्रदर्शनकारियों को राहत मिलेगी।
पटना। नीट यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच बिहार सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। गृह विभाग ने ऐलान किया है कि 26 जुलाई 2026 की शाम छह बजे तक आंदोलन से जुड़े लोगों पर दर्ज सभी प्राथमिकी, परिवाद और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही गिरफ्तार और निरुद्ध किए गए लोगों को भी जल्द रिहा किया जाएगा।
आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने का फैसला
गृह विभाग की ओर से सोमवार को जारी बयान में बताया गया कि नीट यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध और परीक्षा व्यवस्था व उच्च शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और सुधार की मांग को लेकर हुए आंदोलनों से जुड़े मामलों को वापस लिया जाएगा।
सरकार ने यह भी कहा कि आंदोलन में नामजद लोगों के खिलाफ भविष्य में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मुकदमों से लेकर नोटिस तक सभी मामलों में राहत
सरकार के इस फैसले के तहत आंदोलन से जुड़े मुकदमों के अलावा परिवाद और कारण बताओ नोटिस भी वापस लेने की प्रक्रिया में शामिल होंगे।
इसके साथ ही आंदोलन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। सरकार के इस फैसले से आंदोलन में शामिल छात्रों और अन्य लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
कई जिलों में बिगड़ी थी कानून व्यवस्था
छात्र संगठनों के आंदोलन के दौरान राज्य के कई जिलों में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हुई थी। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, इस दौरान सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया था।
इनमें बड़ी संख्या में छात्र और नाबालिग भी शामिल थे, जिन्हें सत्यापन के बाद छोड़ दिया गया। वहीं, हिंसा में शामिल लोगों को न्यायालय भेजा गया था।
हिंसा में 91 पुलिसकर्मी हुए थे घायल
आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में 91 पुलिस पदाधिकारी और जवान घायल हुए थे। कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया था, जबकि एक वाहन को आग के हवाले कर दिया गया था।
सारण में दो प्रखंड विकास पदाधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए थे। वहीं, सिवान और सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक समेत कई पुलिस अधिकारी भी चोटिल हुए थे।
आंदोलनकारियों को मिली बड़ी राहत
आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद अब बिहार सरकार ने मामलों को वापस लेने का फैसला किया है।
सरकार के इस निर्णय को आंदोलनकारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे उन लोगों को भी राहत मिलेगी, जिनके खिलाफ आंदोलन के दौरान प्राथमिकी, परिवाद या कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।
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