पटना में आरक्षण को लेकर प्रदर्शन, गांधी मैदान से मार्च की तैयारी; कई प्रदर्शनकारी हिरासत में

HIGHLIGHTS
- गांधी मैदान के आसपास सुबह से प्रदर्शनकारियों का जुटना शुरू
- जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे पर पुलिस ने की बैरिकेडिंग
- प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और यातायात को लेकर पुलिस अलर्ट
पटना। आरक्षण के मुद्दे पर पटना में दलित संगठनों का आंदोलन तेज हो गया है। मंगलवार को ‘आरक्षण बढ़ाओ, संविधान बचाओ’ आंदोलन के तहत बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी गांधी मैदान के पास एकत्र हुए।
प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण से संबंधित अलग-अलग मांगों को लेकर सरकार और व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन किया। गांधी मैदान से लोकभवन तक मार्च निकालने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण लागू करना, कॉलेजियम सिस्टम को खत्म करना, एससी-एसटी कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण देना और बिहार में एससी-एसटी, ओबीसी एवं ईबीसी के लिए आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 65 प्रतिशत करना शामिल है।
गांधी मैदान के आसपास जुटे प्रदर्शनकारी
सुबह से ही आंदोलन में शामिल होने के लिए अलग-अलग इलाकों से लोग गांधी मैदान के आसपास पहुंचने लगे थे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और झंडे दिखाई दिए। इस दौरान आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को लेकर नारेबाजी भी हुई।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरक्षण सिर्फ सरकारी नौकरियों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसका संबंध सामाजिक प्रतिनिधित्व और समान अवसर से भी है। उनका आरोप है कि दलित और आदिवासी समाज के लोगों को आज भी जातिगत भेदभाव और अत्याचार का सामना करना पड़ता है।
मार्च को रोकने के लिए बैरिकेडिंग
प्रस्तावित मार्च को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे पर बैरिकेडिंग की गई है। इन जगहों पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
डाकबंगला चौराहे पर 23 थानेदार, 9 ASP-DSP और 400 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के साथ यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।
मार्च के दौरान शहर में यातायात प्रभावित होने की आशंका के मद्देनजर पुलिसकर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की कोशिश है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे और आम लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।
निजी क्षेत्र और न्यायपालिका में आरक्षण की मांग
समिति के संयोजक अमर आजाद ने कहा कि देश में अब भी दलित और आदिवासी समाज के लोगों के साथ जाति के आधार पर अत्याचार हो रहा है। उनका कहना है कि दलित या आदिवासी समाज से आने वाला व्यक्ति ऊंचे पद तक पहुंचने के बाद भी भेदभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग एससी-एसटी समाज को मिलने वाले आरक्षण का विरोध करते हैं, जो उचित नहीं है। उन्होंने निजी क्षेत्र और न्यायपालिका में भी आरक्षण लागू करने की मांग की। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण लागू करने और कॉलेजियम सिस्टम समाप्त करने की मांग दोहराई।
बिहार में 65 फीसदी आरक्षण की मांग
आंदोलनकारियों ने बिहार में एससी-एसटी, ओबीसी और ईबीसी के लिए आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि पिछड़े, दलित और आदिवासी समाज की आबादी और सामाजिक स्थिति को देखते हुए आरक्षण का दायरा बढ़ाना जरूरी है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगें सामाजिक न्याय और संविधान से मिले अधिकारों से जुड़ी हुई हैं। आंदोलन के जरिए इन्हीं मुद्दों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.