तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर भड़के प्रशांत किशोर, बोले- यही सरकार की तानाशाही है

HIGHLIGHTS
- प्रशांत किशोर ने तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर सरकार को घेरा।
- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को उन्होंने भाजपा की हार की शुरुआत बताया।
- CJP आंदोलन को समर्थन देते हुए युवाओं के मुद्दों पर साथ देने की बात कही।
पटना। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा है।
रविवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ भाजपा की हार की शुरुआत हो चुकी है। हालांकि, उन्होंने इसे अभी शुरुआत बताया।
उन्होंने कहा कि अगर बिहार में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आती है तो उसका स्वागत किया जाएगा। जो भी व्यक्ति सरकार के अलोकतांत्रिक रवैये और कार्यप्रणाली को चुनौती देना चाहता है, वह उनके साथ हैं।
सीजेपी आने पर स्वागत करेंगे
प्रशांत किशोर ने कहा कि जनता के खड़े होने से सत्ता में बैठे बड़े से बड़े लोगों को भी झुकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर सीजेपी के लोग बिहार आते हैं और छात्रों के मुद्दों को लेकर उनके साथ काम करते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा।
जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है और फर्जी मुकदमों में जेल भेजा जा रहा है, वह सरकार की तानाशाही है।
उन्होंने तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के विरोध में धरना देने की भी घोषणा की। प्रशांत किशोर ने कहा कि सोनम वांगचुक उनके व्यक्तिगत मित्र हैं।
उन्होंने कहा कि कम ही लोग जानते हैं कि लद्दाख में सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने के बाद सरकार ने उन्हें जयपुर की जेल में कई महीनों तक रखा था।
विपक्षी पार्टी कमजोर हो सकती है, विपक्ष नहीं
प्रशांत किशोर ने कहा कि वह सोनम वांगचुक को काफी पहले से जानते हैं। उन्होंने भी सीजेपी के मंच पर जाकर अपना योगदान दिया है। यह किसी पार्टी से जुड़ा मामला नहीं है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और लोगों के दबाव के कारण जवाबदेही की प्रक्रिया शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि देश में विपक्षी पार्टी कमजोर हो सकती है, लेकिन विपक्ष कमजोर नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो प्रदर्शन हुआ, वह किसी एक सोनम वांगचुक का आंदोलन नहीं था। उसमें शामिल हजारों लोग सीजेपी का झंडा लेकर नहीं आए थे, बल्कि वे आम युवा थे जो लगातार हो रहे पेपर लीक, बेरोजगारी और भ्रष्ट व्यवस्था से परेशान हैं।
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