शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को POCSO केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत, अग्रिम जमानत बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत देते हुए POCSO मामले में उनकी अग्रिम जमानत में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें उन्हें गिरफ्तारी से राहत दी गई थी।
यह फैसला जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कहा, “माफ कीजिए, हम इसमें दखल नहीं देंगे।”
हाई कोर्ट के आदेश पर मुहर
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 25 मार्च को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को POCSO एक्ट के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत दी थी। साथ ही कोर्ट ने दोनों को जांच में सहयोग करने और मीडिया में किसी भी तरह का बयान देने से बचने का निर्देश भी दिया था।
शिकायत और आरोप
यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जो POCSO कोर्ट के निर्देश पर दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ ‘बटुकों’ के साथ यौन शोषण की घटनाएं हुई थीं। हालांकि, आरोपियों की ओर से इन दावों को चुनौती दी गई है।
अवमानना याचिका भी खारिज
इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दायर अवमानना याचिका को भी खारिज कर दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन करते हुए उन्होंने सार्वजनिक सभाएं कीं और बयान दिए।
हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि जमानत शर्तों का उल्लंघन हो रहा है, तो इसके लिए जमानत रद्द कराने का उचित कानूनी रास्ता अपनाया जा सकता है।
आगे की स्थिति
इस पूरे मामले में अदालतों की ओर से अलग-अलग आदेशों के बाद अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से अग्रिम जमानत को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो गई है।
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