'देहात' के सबसे पुराने पाठक और शुभचिंतक श्रीपाल सांगवान का निधन

HIGHLIGHTS
- श्रीपाल सांगवान का जन्म 27 जुलाई 1934 को अविभाजित पंजाब के लाहौर शिविर में हुआ था।
- कृषि और ग्रामीण विषयों में उनकी गहरी रुचि थी और उन्होंने इन विषयों पर लेखन भी किया।
- उन्होंने मेरठ से अपना साप्ताहिक पत्र प्रकाशित किया और कृषि व ग्रामीण विषयों पर पुस्तक भी लिखी।
हमारे लिए यह अत्यंत दुखदाई खबर है कि 'देहात' के सबसे पुराने पाठक और शुभचिंतक श्रीपाल सांगवान का उनके पैतृक ग्राम कलंजरी (मेरठ) में निधन हो गया। श्री सांगवान का जन्म 27 जुलाई, 1934 को अविभाजित पंजाब के लाहौर शिविर में हुआ था जहां उनके पिता चौधरी नैनसिंह सर्विस करते थे। विभाजन के पश्चात वे लाहौर से उत्तर प्रदेश चले आए थे, गन्ना विभाग में नौकरी करते थे।
सन् 1948 में श्रीपाल जी के पिता गन्ना विभाग मुजफ्फरनगर में कामदार के पद पर नियुक्त हो कर मुजफ्फरनगर के मौहल्ला गंगारामपुरा में सपरिवार किराये के मकान में रहने लगे। तब 'देहात प्रेस' भी गंगारामपुरा में स्थित था। अखबार तब लिथो प्रेस पर उर्दू भाषा में छपता था। श्रीपाल जी कई कई घंटे प्रेस में रहते थे। यहीं से उन्हें पत्रकारिता में रुर्चि उत्पन्न हुई और खेती किसानी पर लेख लिखने लगे। इसी बीच उनके पिता का स्थानान्तरण मेरठ हो गया।
कृषि ग्रामीण विषयों में उनकी गहरी रुचि रही। मेरठ में समाजसेवी शकुंतला पुण्डरीकाक्ष ने उन्हें काफी प्रोत्साहन दिया। वे मेरठ के कुछ समाचार पत्रों में लिखने लगे और अपना एक साप्ताहिक पत्र भी मेरठ से प्रकाशित किया। व्यवसायिक दृष्टिकोण न होने के कारण वह अधिक दिनों नहीं चल पाया। श्रीपाल जी ने कृषि व ग्रामीण विषयों पर पुस्तक भी प्रकाशित की।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वे आकाशवाणी दिल्ली से जुड़े। 'कृषि दर्शन' कार्यक्रम में नियमित रूप से हिस्सा लेने लगे। पहली रेडियो वार्ता पर उन्हें 18 रुपये पारिश्रमिक मिला था। श्रीपाल जी अंतिम समय तक कृषि दर्शन से जुड़े रहे। इसी 23 जुलाई 2026 को वे आकाशवाणी नजीबाबाद अपनी पौत्री मालिनी के साथ गये थे, जहां मालिनी की रेडियो वार्ता थी।
श्रीपाल जी को अध्ययन में बड़ी रुचि थी। उनके पास हजारों पुस्तकों का संग्रह है। हर समय किताबों में डूबे रहते थे। मुझसे सप्ताह में दो बार बात जरूर करते। वर्ष में एक बार मुजफ्फरनगर आकर बातचीत करते। उनके पास हजारों महत्वपूर्ण स्मरणों का खजाना था। निश्चित रूप से श्रीपाल जी के जाने से एक युग का पटाक्षेप हो गया। मैं देहात परिवार की ओर से उनके पुत्र अमित सांगवान तथा उनके परिजनों को संवेदना प्रेषित करता हूं। उनका निधन 'देहात परिवार' की भी व्यक्तिगत क्षति है। प्रभु श्रीपाल सांगवान की आत्मा को शांति प्रदान करें।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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