अमेरिकी सीनेट ने पास किया बड़ा बिल, भारत-चीन पर लग सकता है 100% टैरिफ

HIGHLIGHTS
- अमेरिकी सीनेट में बिल के पक्ष में 86 और विरोध में 11 वोट पड़े।
- विधेयक में रूस के शीर्ष अधिकारियों और वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंध का प्रावधान है।
- भारत और चीन समेत रूस से तेल-गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देश टैरिफ के दायरे में आ सकते हैं।
अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को देने वाले विधेयक को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। बिल के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 11 सांसदों ने इसका विरोध किया। अब इसे अमेरिकी हाउस यानी कांग्रेस में पेश किया जाएगा। अगर वहां भी मंजूरी मिल जाती है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और चीन जैसे देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। कानून लागू होने के बाद रूसी अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगाए जाने का प्रावधान है।
रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना मकसद
इस विधेयक को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों का समर्थन मिला है। इसका उद्देश्य रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। साथ ही उन देशों को भी निशाने पर लेने की तैयारी है, जो रूस से तेल और गैस खरीदकर उसके युद्ध प्रयासों को आर्थिक समर्थन दे रहे हैं।
विधेयक में क्या-क्या प्रावधान हैं?
- रूसी सरकार के शीर्ष अधिकारियों पर अनिवार्य प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है, जिसमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल हैं।
- रूसी वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा परियोजनाओं पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
- रूसी कुलीन वर्ग, सरकारी उद्यमों और रूस के रक्षा उद्योग का समर्थन करने वाली विदेशी कंपनियां भी इसके दायरे में आ सकती हैं।
- रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाया जा सकता है। इनमें भारत और चीन भी शामिल हैं।
- टैरिफ की दर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर तय करेंगे।
- विधेयक में राष्ट्रपति को प्रतिबंधों और पाबंदियों से छूट देने का अधिकार भी दिया गया है।
- छूट देने के लिए राष्ट्रपति को कांग्रेस को प्रमाणित करना होगा कि यह कदम राष्ट्रीय हित में है।
- रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 फीसदी से कम आयात करने वाले देशों को छूट मिल सकती है।
- रूसी प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल को कम करने के लिए काम कर रहे देशों को भी छूट देने का प्रावधान है।
लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया बिल
इस विधेयक का नाम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में रखा गया है। वह इस कानून को तैयार करने वाले प्रमुख लोगों में शामिल थे। बिल पहली बार 1 अप्रैल 2025 को पेश किया गया था। जुलाई के दूसरे सप्ताह में 71 वर्ष की उम्र में ग्राहम का निधन हो गया। अब इस विधेयक की सीनेट से मंजूरी को उनके प्रयासों की सफलता के तौर पर भी देखा जा रहा है।
ट्रंप ने शुरुआत में किया था विरोध
सीनेट के रिपब्लिकन नेताओं ने शुरुआत में इस विधेयक को वोटिंग के लिए नहीं रखा था, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसका विरोध कर रहे थे। जनवरी 2025 में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के बाद से ट्रंप ने प्रतिबंधों से जुड़े फैसले कांग्रेस के बजाय व्हाइट हाउस से लेने पर जोर दिया था।
हाउस से मंजूरी की राह में चुनौतियां
रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए व्यापक समर्थन के बावजूद इस विधेयक को अमेरिकी हाउस से मंजूरी मिलने में मुश्किल आ सकती है। कुछ सांसदों को चिंता है कि ट्रंप को टैरिफ से जुड़े अतिरिक्त अधिकार देने से अमेरिकी आयातकों और उपभोक्ताओं की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक नुकसान की आशंका भी जताई गई है।
न्यूयॉर्क के ग्रेगरी मीक्स और वर्जीनिया के डॉन बेयर ने बयान में कहा कि ट्रंप को टैरिफ से जुड़े अधिकार देने को लेकर उनकी बुनियादी चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। ट्रंप इन अधिकारों को अपनी विदेश नीति के ‘अमेरिका फर्स्ट’ दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
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