पति के कर्ज के लिए पत्नी जिम्मेदार नहीं, हाईकोर्ट ने SBI को रकम लौटाने का दिया आदेश

HIGHLIGHTS
- नेहा मिश्रा के पति ने नवंबर 2020 में 15 लाख रुपये का लोन लिया था।
- मई 2021 में कोविड-19 के कारण पति का निधन हो गया था।
- सितंबर 2025 में बैंक ने नेहा मिश्रा को कानूनी नोटिस भेजा था।
लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि पति द्वारा लिए गए व्यक्तिगत ऋण की भरपाई के लिए उसकी पत्नी या विधवा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक की कार्रवाई को बैंकिंग नियमों का उल्लंघन माना और महिला की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से काटी गई पूरी रकम ब्याज सहित वापस करने का निर्देश दिया।
क्या है पूरा मामला?
लखनऊ निवासी नेहा मिश्रा के पति रिंग रोड स्थित मेडिसिन अस्पताल में असिस्टेंट प्रोफेसर थे। उन्होंने नवंबर 2020 में एसबीआई से 15 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया था। मई 2021 में कोविड-19 के कारण उनका निधन हो गया।
पति की मौत के बाद बैंक ने बकाया लोन की वसूली के लिए सितंबर 2025 में नेहा मिश्रा को कानूनी नोटिस भेजा। साथ ही उनका सैलरी अकाउंट भी फ्रीज कर दिया गया। हालांकि, आरबीई लोकपाल के हस्तक्षेप के बाद सैलरी अकाउंट को बाद में बहाल कर दिया गया।
इसके बाद बैंक ने प्रक्रिया के दौरान महिला की फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वा दी और उसमें से 19.90 लाख रुपये काट लिए।
कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शेखर बी. सर्राफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने की। अदालत ने एसबीआई की इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे बैंकिंग प्रथाओं का घृणास्पद उल्लंघन करार दिया।
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