बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने दिया इस्तीफा, स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला

HIGHLIGHTS
- बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दिया।
- संसदीय अध्यक्ष हाफिजुद्दीन अहमद नए राष्ट्रपति के चुनाव तक कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगे।
- कैबिनेट सचिव नसीमुल गनी का नाम नए राष्ट्रपति के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में सामने आ रहा है।
बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके सहयोगी ने इसकी जानकारी दी। उनका कार्यकाल अभी करीब दो साल बाकी था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनके इस्तीफे को लेकर चर्चाएं तेज थीं।
स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा
इस्तीफे की वजह पूछे जाने पर 76 वर्षीय मोहम्मद शहाबुद्दीन ने द डेली स्टार अखबार को बताया कि वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। राष्ट्रपति भवन के एक प्रवक्ता ने पीटीआई को बताया कि शहाबुद्दीन के प्रतिनिधि उनका त्यागपत्र लेकर संसद के लिए रवाना हो चुके हैं।
उनका इस्तीफा संसदीय अध्यक्ष हाफिजुद्दीन अहमद को सौंपा जाएगा। बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक हाफिजुद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगे।
कौन संभाल सकता है राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी?
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स और सामने आए खुलासों के अनुसार, कैबिनेट सचिव नसीमुल गनी का नाम नए राष्ट्रपति के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर सामने आ रहा है।
मोहम्मद शहाबुद्दीन को अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति चुना गया था। जुलाई-अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी।
5 अगस्त 2024 को शेख हसीना भारत आ गई थीं और तब से वह यहीं रह रही हैं। इस राजनीतिक बदलाव के बाद भी शहाबुद्दीन अपने संवैधानिक पद पर बने रहने वाले शीर्ष पदाधिकारियों में शामिल थे।
कौन हैं मोहम्मद शहाबुद्दीन?
मोहम्मद शहाबुद्दीन का जन्म बांग्लादेश के पश्चिमोत्तर पबना जिले में हुआ था। वह 1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक की शुरुआत में अवामी लीग के छात्र और युवा विंग से जुड़े रहे।
उन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम में भी हिस्सा लिया था। 15 अगस्त 1975 को बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान और उनके परिवार के सदस्यों की सैन्य तख्तापलट में हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन करने के कारण उन्हें कैद भी किया गया था।
बाद में वर्ष 1982 में वह देश की न्यायिक सेवा से जुड़े। 1996 के चुनावों में अवामी लीग के सत्ता में लौटने के बाद शहाबुद्दीन ने बंगबंधु हत्याकांड की जांच टीम के समन्वयक के रूप में काम किया। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अवामी लीग सलाहकार परिषद के सदस्य बने।
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