भोजशाला विवाद: नमाज स्थल को लेकर प्रशासन और मुस्लिम प्रतिनिधियों में नहीं बनी सहमति

HIGHLIGHTS
- भोजशाला में नमाज स्थल को लेकर प्रशासन और मुस्लिम प्रतिनिधियों की बैठक बेनतीजा रही।
- मुस्लिम पक्ष ने वैकल्पिक स्थान पर आपत्ति जताते हुए नजदीकी जगह की मांग की है।
- सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।
धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। शुक्रवार की नमाज के लिए जिला प्रशासन की ओर से तय किए गए वैकल्पिक स्थान को लेकर मुस्लिम पक्ष और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन सकी है। मुस्लिम समाज ने प्रशासन द्वारा सुझाए गए स्थान पर आपत्ति जताई है।
गुरुवार देर रात प्रशासन ने मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया था। काफी समय तक चली चर्चा के बावजूद नमाज स्थल को लेकर कोई समाधान नहीं निकल पाया। इस बीच सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले की सुनवाई 29 जुलाई को करेगा।
सुप्रीम कोर्ट में 29 जुलाई को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भोजशाला परिसर के लिए तय किए गए वैकल्पिक नमाज स्थल की दूरी को लेकर मुस्लिम पक्ष की अंतरिम याचिका पर 29 जुलाई को सुनवाई करने पर सहमति जताई।
मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि उन्हें भोजशाला परिसर के नजदीक शुक्रवार की नमाज अदा करने के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाए।
22 जुलाई को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका को शुक्रवार को सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, मामला कारण सूची में शामिल नहीं होने पर वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने दिन की कार्यवाही के अंत में इसका उल्लेख किया।
अहमदी ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराया गया वैकल्पिक स्थान विवादित परिसर से काफी दूर है। उन्होंने बताया कि दो शुक्रवार की नमाज छूट चुकी है और तय किया गया स्थान करीब 1.3 किलोमीटर दूर है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वैकल्पिक स्थल की दूरी करीब 900 मीटर है।
इस पर अहमदी ने कहा, "हमारे पास हेलीकॉप्टर नहीं हैं... सड़क मार्ग से दूरी 1.3 किलोमीटर है। अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने की कोशिश की जा रही है।"
तुषार मेहता ने कहा कि वह भावनाओं के आधार पर प्रभावित नहीं हो सकते। इसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अंतरिम याचिका पर 29 जुलाई को सुनवाई की जाएगी।
इससे पहले तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि प्रशासन से भोजशाला परिसर के और नजदीक वैकल्पिक स्थान तलाशने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा था कि प्रशासन इस प्रक्रिया में जुटा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था नमाज की व्यवस्था का निर्देश
गौरतलब है कि 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, जिनमें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर घोषित करने के फैसले को चुनौती दी गई है, राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि अंतिम निर्णय तक हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज के लिए विवादित परिसर से सटे खुले स्थान की व्यवस्था की जाए।
सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात
शुक्रवार को शहर में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने पहले से तैयारियां पूरी कर ली हैं। जावरा और इंदौर से पुलिस की दो विशेष कंपनियां धार पहुंच चुकी हैं।
शहर में सुरक्षा के लिए 350 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। संवेदनशील क्षेत्रों, भोजशाला परिसर और चालीस पीर दरगाह पर पुलिस बल मौजूद है। इसके अलावा पुलिस मोबाइल वाहन और दोपहिया गश्ती दल लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रहे हैं।
मुस्लिम पक्ष ने जताई नजदीकी स्थान की मांग
मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष और मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद ने कहा कि प्रशासन ने चालीस पीर की जगह बताई थी, जो कमाल मौला मस्जिद से करीब दो किलोमीटर दूर है। उन्होंने बताया कि इस पर मुस्लिम समाज ने आपत्ति दर्ज कराई है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हाजी मुनीर अहमद की याचिका में आवेदन दिया गया है, जिसमें दूरी को लेकर आपत्ति जताई गई है। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि यथासंभव सबसे नजदीक स्थान पर नमाज की व्यवस्था की जाए।
अब्दुल समद ने कहा कि बैठक में जनप्रतिनिधि, याचिकाकर्ता और इंटरवीनर शामिल हुए थे, ताकि नमाज के लिए उनकी जमीन पर जाने की व्यवस्था हो सके। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज शुरू से अपनी जमीन पर ही नमाज अदा करने की मांग कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन अब तक ऐसा स्थान उपलब्ध नहीं करा सका है, जहां नमाज अदा की जा सके और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन भी हो।
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