ईंधन गैस एवं पेट्रोलियम पर छिछोरी राजनीति !

राजधानी दिल्ली की सड़कों पर आज अजीबोगरीब दृश्य दिखाई दिया। सड़क पर कांग्रेस के कार्यकर्ता, कार्यकर्त्रियां सिर पर रसोई गैस के खाली सिलेंडर उठाये उछल-कूद कर रहे हैं। कुछ ने एल.पी.जी. के ठप्पे वाली कमीजें भी पहन रखी हैं। सड़क के बीचों बीच चूल्हा जलाया गया है और राहुल गांधी चूल्हे पर बनी चाय का प्याला लिए हुए चुस्कियां ले रहे हैं। उनके चेहरे पर अजीब किस्म की मुस्कुराहट है मानो न जंग ट्रंप ने जीता, न मोजतबा खामेनेई ही जीता, जीता है तो राहुल जीता है क्योंकि राहुल का तीर निशाने पर लगा है। देश में ईंधन गैस की कमी और कथित मूल्य वृद्धि को ढाल बना राहुल, अखिलेश, ममता नरेंद्र मोदी पर हमलावर हैं। पूरे देश में हड़बड़ी, घबराहट व असंतोष की आग लगाने को ये आतुर हैं।
इंडियन आयल कॉरपोरेशन ने रसोई गैस की बुकिंग शहरी क्षेत्र में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन कर दी है। लेकिन राहुल व अखिलेश द्वारा फैलाई गई अफवाह के कारण उपभोक्ता निर्धारित समय से पहले ही खाली सिलेंडर लेकर गैस एजेंसियों पर पहुंच रहे। उपभोक्ताओं की इस हड़बड़ी का लाभ कालाबाजारियें उठाने में जुट गए हैं। जौनपुर के जफराबाद में एक जनसेवा केन्द्र और कॉस्मेटिक की दुकान में 62 अवैध गैस सिलिंडर बरामद हुए। भदोही के दुर्गागंज चौराहे पर 12, हापुड़ के सपा नेता अब्दुल रेहान के कब्जे से 55 अवैध सिलिंडर मिले।
सर्व विदित है कि पश्चिम एशिया की जंग के कारण दुनियाभर में ऊर्जा का संकट है। इसके बावजूद भारत में ईंधन गैस एवं पेट्रोलियम पदार्थ की किल्लत नहीं है लेकिन बनावटी कमी दिखाई जा रही हैं। अफवाहों व धूर्तता के कारण आपाधापी मची है। राहुल ने कोविड-19 के दौरान भी ऐसा ही धमाल मचाया था। अखिलेश ने तो मोदी की वैक्सीन बता कर टीका लगाने से इंकार कर संप्रदाय विशेष को बरगलाया था। कोविड व ऊर्जा संकट मोदी सरकार द्वारा पैदा नहीं किए गए यह विश्वव्यापी परेशानी है। भारतीयों को इन राजनीतिक लम्पटों के बहकावे में न आकर धैर्य से परिस्थिति से निपटना चाहिए।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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