‘वोट चोरी’ के आरोपों पर राहुल गांधी का बड़ा दावा, बोले- चुनावी व्यवस्था में हुई गड़बड़ी

HIGHLIGHTS
- राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों का विशेष रूप से उल्लेख किया।
- उन्होंने मतदाताओं के वोट की सुरक्षा को चुनाव आयोग की जिम्मेदारी बताया।
- हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात में एंटी-इन्कंबेंसी को लेकर सवाल उठाए।
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता के दौरान देश की चुनावी व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ियां हुई हैं और उनके पास इन आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यह मामला सिर्फ चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे से भी जुड़ा हुआ है।
राहुल गांधी ने कहा कि वह यह बात बिना किसी आधार के नहीं कह रहे हैं। उनके मुताबिक, उनके पास मौजूद जानकारी और सबूत इस बात को 100 प्रतिशत निश्चित करने के लिए पर्याप्त हैं कि भारतीय चुनावों में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने खास तौर पर 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों का उल्लेख किया।
'वोट खत्म हुआ तो संविधान काम नहीं करेगा'
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाताओं के वोट की सुरक्षा करना आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि वोट की व्यवस्था कमजोर होती है तो संविधान की ताकत भी खत्म हो जाती है और इसका असर कानून तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसका दायित्व देश के मतदाताओं के वोट की रक्षा करना है। राहुल गांधी के मुताबिक, वोट की सुरक्षा में कथित गड़बड़ी का असर केवल चुनाव तक नहीं रहता, बल्कि इससे पूरे लोकतांत्रिक ढांचे पर प्रभाव पड़ता है।
एंटी-इन्कंबेंसी को लेकर भी सवाल
राहुल गांधी ने भाजपा के कई राज्यों में लगातार चुनावी प्रदर्शन का जिक्र करते हुए एंटी-इन्कंबेंसी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत में आमतौर पर सरकारों के खिलाफ एंटी-इन्कंबेंसी देखने को मिलती है, लेकिन कई राज्यों में यह प्रभाव खत्म होता नजर आ रहा है।
उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि अलग-अलग राज्यों में एंटी-इन्कंबेंसी कैसे खत्म हो सकती है। इसके बाद उन्होंने इराक और उत्तर कोरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां लोकतंत्र नहीं होता, वहां एंटी-इन्कंबेंसी भी नहीं होती।
'वोट चोरी से कानून चोरी और फिर संस्था चोरी'
राहुल गांधी ने अपने बयान में ‘वोट चोरी’, कानून और संस्थाओं के बीच एक कड़ी होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी चुनाव में वोटों के साथ गड़बड़ी होती है और उसके आधार पर सांसद चुने जाते हैं, तो उनके जरिए बनाए जाने वाले कानूनों और किए जाने वाले संस्थागत बदलावों पर भी सवाल उठता है।
उन्होंने कहा कि वोट चोरी से कानून चोरी और कानून चोरी से संस्था चोरी की स्थिति बनती है। राहुल गांधी ने दावा किया कि आने वाले समय में उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगे।
'चुनाव आयुक्तों ने CEC ज्ञानेश कुमार पर उठाए सवाल'
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार के कामकाज और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए हैं।
यह बयान इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
हालांकि, चुनाव आयोग ने रिपोर्ट में बताए गए मतभेदों को संस्था के कामकाज में टूट के रूप में पेश किए जाने को खारिज किया है। आयोग के अनुसार अलग-अलग विचार और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं तथा उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
CEC के इस्तीफे की मांग
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल पद छोड़ने की मांग भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को लोगों के वोट की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन चुनावी व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के चलते इस जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि उनके पास ‘वोट चोरी’ को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पहले भी सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।
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