CWC बैठक में थरूर पर खरगे की चुटकी, बोले- लेख लिखने के साथ कार्यक्रमों में भी आएं

HIGHLIGHTS
- कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक मंगलवार को आयोजित हुई।
- बैठक में रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के आयोजन पर चर्चा हुई।
- शशि थरूर ने 2 अक्टूबर को रैली आयोजित करने का सुझाव दिया।
नई दिल्ली। कांग्रेस की मंगलवार को हुई वर्किंग कमेटी की बैठक के दौरान पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद शशि थरूर के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में नोंकझोक देखने को मिली।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में रैलियों के आयोजन को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान खरगे ने शशि थरूर पर चुटकी लेते हुए कहा कि उन्हें केवल अखबारों में लेख लिखने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीन पर होने वाले कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेना चाहिए।
क्या था पूरा मामला?
बैठक में कांग्रेस या विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की ओर से विरोध प्रदर्शन और रैलियों के आयोजन को लेकर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद शशि थरूर ने सुझाव दिया कि रैली या विरोध प्रदर्शन 2 अक्टूबर यानी महात्मा गांधी की जयंती के दिन आयोजित किया जाना चाहिए।
थरूर के इस सुझाव पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उनकी ओर इशारा करते हुए मुस्कुराकर कहा कि उन्हें भी इसमें जरूर शामिल होना चाहिए। खरगे ने हल्के अंदाज में कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि थरूर केवल अखबारों में लेख लिखते रहें और पार्टी के लोग उन्हें अगले दिन सुबह अखबार में पढ़ें।
सूत्रों के मुताबिक, खरगे की इस हल्की-फुल्की टिप्पणी पर शशि थरूर ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने केवल सिर हिलाकर अपनी सहमति जताई।
राहुल गांधी और पार्टी नेताओं के बीच संवाद
बैठक के दौरान राहुल गांधी से जुड़ा एक और हल्का-फुल्का प्रसंग सामने आया। मल्लिकार्जुन खरगे ने राहुल गांधी को भरोसा दिलाते हुए कहा कि पूरी पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
इस पर राहुल गांधी ने चुटीले अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि पीछे खड़े होना ठीक है, लेकिन उम्मीद है कि पार्टी के लोग बहुत ज्यादा पीछे नहीं होंगे।
इसके बाद राहुल गांधी ने देश के चुनावी मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पहले जब वह 'वोट चोरी' या चुनावी धांधली की बात करते थे, तब लोग और यहां तक कि पार्टी के भीतर के लोग भी इस पर शक करते थे।
राहुल गांधी ने कहा कि अब स्थिति बदल गई है। उनके मुताबिक, पहले जहां केवल 20 प्रतिशत लोग इस बात पर विश्वास करते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 80 प्रतिशत हो गया है।
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