मानसून सीजन खत्म, देश में सामान्य से 12.6 फीसदी कम बारिश; अक्टूबर में भी राहत के आसार कम

HIGHLIGHTS
- जून से सितंबर के बीच देश में 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।
- 2001 के बाद यह चौथी सबसे कम मानसूनी बारिश रही।
- 15 जुलाई तक बारिश की कमी 51.1 फीसदी पहुंच गई थी।
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून का मौसम बुधवार को समाप्त हो गया। इस साल देश में सामान्य से 12.6 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच देश में कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई। वर्ष 2001 के बाद यह चौथी सबसे कम मानसूनी बारिश रही।
इस मानसून के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का पैटर्न काफी अलग रहा। पंजाब, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर चारों महीनों में लगातार सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।
मानसून की शुरुआत से ही बारिश रही कम
आईएमडी के साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक, मानसून की शुरुआत कमजोर रही। जून और जुलाई के शुरुआती दौर में बारिश सामान्य से काफी कम दर्ज की गई। 15 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में बारिश की कमी बढ़कर 51.1 फीसदी तक पहुंच गई थी।
जुलाई के आखिरी हिस्से और अगस्त की शुरुआत में बारिश में कुछ सुधार देखने को मिला। इससे कुछ समय के लिए राहत मिली, लेकिन यह स्थिति ज्यादा समय तक कायम नहीं रही।
अगस्त के मध्य से बारिश एक बार फिर सामान्य से नीचे चली गई। 9 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में बारिश की कमी 36.3 फीसदी तक पहुंच गई थी। मानसून के अंतिम चरण में कमी कुछ कम हुई, लेकिन शुरुआती महीनों में हुई बारिश की कमी पूरी नहीं हो सकी।
पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में 25 फीसदी कम बारिश
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 25 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में बारिश 24 फीसदी कम रही, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में 6 फीसदी की कमी दर्ज हुई।
मध्य भारत में बारिश की स्थिति लगभग सामान्य रही और यहां 2 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
राज्य और क्षेत्र के स्तर पर देखें तो अरुणाचल प्रदेश में बारिश 44 फीसदी कम रही। असम और मेघालय में 39 फीसदी, बिहार में 32 फीसदी, पंजाब में 41 फीसदी, मराठवाड़ा में 39 फीसदी और केरल में 28 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
देश के 42 फीसदी भूमि क्षेत्र को कवर करने वाले 17 मौसम संबंधी उपखंडों में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हुई। वहीं, 53 फीसदी क्षेत्र को कवर करने वाले 18 उपखंडों में बारिश सामान्य रही।
अक्टूबर में भी कम बारिश का अनुमान
आईएमडी के अनुसार, सितंबर में उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से अधिक बारिश हुई, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीपीय, पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रही।
मौसम विभाग का अनुमान है कि अक्टूबर में भी बारिश का यह असमान पैटर्न जारी रह सकता है। पूरे देश में अक्टूबर की बारिश दीर्घकालिक औसत की 85 फीसदी से कम रहने की संभावना है।
देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
अक्टूबर से दिसंबर के दौरान भी देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया गया है। इस दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से अधिक रह सकती है।
नवंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो
यह स्थिति ऐसे समय बनी है, जब अल नीनो की परिस्थितियां मजबूत हो रही हैं। आईएमडी के महानिदेशक एम महापात्र ने कहा, "अल नीनो के नवंबर में चरम पर पहुंचने और उसके बाद कमजोर होने की संभावना है।"
सितंबर में तापमान ने भी रिकॉर्ड बनाए। देश का औसत अधिकतम तापमान 32.05 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1901 के बाद सितंबर महीने का सबसे अधिक औसत अधिकतम तापमान है।
औसत न्यूनतम तापमान 23.39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो अब तक का चौथा सबसे अधिक सितंबर औसत न्यूनतम तापमान है। वहीं, 27.72 डिग्री सेल्सियस का औसत तापमान 1901 के बाद सितंबर का पांचवां सबसे अधिक औसत रहा।
अक्टूबर में भी गर्मी से राहत के आसार कम
एम महापात्र के मुताबिक, अक्टूबर में भी देश के ज्यादातर हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। हालांकि, पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों तथा मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य रह सकता है।
देश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। पूर्वोत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम या सामान्य रह सकता है।
रबी फसलों पर पड़ सकता है असर
कम बारिश और अधिक तापमान का यह संयोजन सर्दियों में बोई जाने वाली फसलों के मौसम में मिट्टी की नमी को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं होगा।
मानसून की कमी अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रही है। मध्य, दक्षिणी प्रायद्वीपीय, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ वर्षा आधारित इलाकों में मिट्टी की नमी की कमी का दबाव अधिक हो सकता है।
आईएमडी के जिला स्तर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में 32 फीसदी जिले सामान्य से कम बारिश वाली श्रेणी में रहे। वहीं, 16 फीसदी जिलों में बारिश में बड़ी कमी दर्ज की गई।
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