सुप्रीम कोर्ट में पटाखों के इस्तेमाल पर सुनवाई, तय समय और पटाखों के प्रकार पर होगा विचार

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट में दिवाली से पहले पटाखे जलाने से जुड़े मामले की सुनवाई हुई।
- अदालत ने धार्मिक भावनाओं के साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी चिंताओं का जिक्र किया।
- जस्टिस एम. एम. सुंद्रेश ने पटाखों के इस्तेमाल को लेकर टिप्पणी की।
सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले पटाखे जलाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पूरे देश में पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर विचार नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक भावनाओं के साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
जस्टिस एम. एम. सुंद्रेश ने कहा कि चौबीसों घंटे पटाखे जलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने संकेत दिया कि अदालत पटाखे जलाने के लिए निर्धारित समय और इस्तेमाल किए जा सकने वाले पटाखों के प्रकार पर विचार करेगी।
कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को बेरियम की जांच और डेसिबल लेवल तय करने के साथ-साथ संयुक्त फायर टेस्ट के लिए भी समय दिया है। मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
एएसजी ने कोर्ट से मांगा समय
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि बेरियम आधारित पटाखों की आउटडोर टेस्टिंग अभी बाकी है। इसके लिए उन्होंने 15 अक्टूबर तक का समय मांगा।
सुनवाई के दौरान उन्होंने बताया कि कुछ शर्तों के साथ जॉइंट पटाखे बनाए जा सकते हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि जॉइंट पटाखे क्या होते हैं। ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि ये लड़ी जैसे होते हैं और इन पर भी प्रतिबंध लगाया गया था।
जॉइंट पटाखा या लड़ी कई छोटे-छोटे पटाखों को एक धागे या तार के जरिए आपस में जोड़कर बनाई गई लंबी माला होती है। इसे आम बोलचाल में 'पटाखों की माला', 'लड़ी' या 'चटाई पटाखा' भी कहा जाता है।
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