‘ओलंपिक स्तर के खिलाड़ी हैं...’, NHAI टेंडर पर क्यों भड़के नितिन गडकरी?

HIGHLIGHTS
- टेंडर के लिए तकनीकी और वित्तीय योग्यता तय करने की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल
- अधिकारियों द्वारा योग्यता तय करने के तरीके में बदलाव की जरूरत बताई
- महाराष्ट्र के एक प्रोजेक्ट में कम दर पर टेंडर और सब-कॉन्ट्रैक्ट का उदाहरण दिया
नई दिल्ली। हाईवे निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर अपने मंत्रालय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
गडकरी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में टेंडर के लिए अधिकारी अपनी इच्छा के अनुसार तकनीकी और वित्तीय योग्यता तय कर सकते हैं। उन्होंने इसके लिए एक स्थायी नीति बनाए जाने की जरूरत बताई।
गडकरी ने NHAI को ठहराया जिम्मेदार
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तकनीकी और वित्तीय योग्यता निजी ठेकेदार ही तय करते हैं, क्योंकि वहां संबंध काफी अच्छे होते हैं। उन्होंने कहा कि किसे योग्य और किसे अयोग्य घोषित करने के लिए क्या लिखा जाए, इस खेल में वे ओलंपिक स्तर के खिलाड़ी हैं।
गडकरी ने बार-बार एनएचएआई के टेंडर का उल्लेख किया। ऐसे में माना जा रहा है कि उनका इशारा एनएचएआई और ठेकेदारों की मिलीभगत की ओर था। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि नीतियां कौन बनाएगा।
फिक्की की ओर से बुधवार को आयोजित टनल एंड ब्रिज कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी बात मंत्रालय के अधिकारियों पर निशाना साधते हुए शुरू की।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुर्भाग्य से नीतियां बनाने वाले यहां मौजूद नहीं हैं। उन्होंने उन्हें भी बुलाने की बात कही और कहा कि सरकार में काम करने वालों को लगता है कि उन्हें सब कुछ पता है।
महाराष्ट्र के एक प्रोजेक्ट का उदाहरण देते हुए गडकरी ने बताया कि वहां एक ठेकेदार ने निर्धारित निविदा मूल्य से काफी कम दर पर टेंडर लिया और बाद में उससे कम कीमत पर सब-कॉन्ट्रैक्ट कर दिया। उन्होंने बताया कि संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा गया है, लेकिन कई स्तरों पर सब-कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने को उन्होंने बड़ी समस्या बताया।
उन्होंने कहा कि वह ऐसा आदेश जारी करने जा रहे हैं, जिसके तहत जीएसटी रिकॉर्ड के आधार पर यह जांच की जाएगी कि किसी टेंडर में ठेकेदार ने कितने सब-कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए भी कुछ नियम हैं। ठेकेदार सब-कॉन्ट्रैक्ट करते हैं और गुणवत्ता खराब होने पर बदनामी उनकी होती है।
घटिया DPR को बताया बड़ी समस्या
नितिन गडकरी ने एक बार फिर खराब डीपीआर को बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि घर बैठे गूगल के जरिए डीपीआर तैयार की जाती है। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से सड़क हादसे हो रहे हैं और देश को नुकसान हो रहा है।
गडकरी ने बताया कि वह डीपीआर के लिए ऐसा नियम चाहते थे कि जिस डीपीआर कंसल्टेंट में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी किसी अंतरराष्ट्रीय कंपनी की हो, उसे ही काम दिया जाए। लेकिन उनके अनुसार, व्यवस्था को यहां लचीला बना दिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों पर भी नजर है और उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा।
गडकरी ने दावा किया कि ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है, जिसमें ठेकेदारों और डीपीआर कंसल्टेंट का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया जाएगा। उनकी रेटिंग के आधार पर ही तय किया जाएगा कि भविष्य में वे किसी टेंडर के लिए योग्य रहेंगे या नहीं।
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