पंजाब: परविंदर झोटा मामले में 23वें दिन बनी सहमति, परिवार को 2 करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी का भरोसा

HIGHLIGHTS
- परविंदर सिंह झोटा को इंसाफ दिलाने के संघर्ष का 23वां दिन।
- पंजाब सरकार और एक्शन कमेटी के बीच करीब पांच घंटे तक चली बैठक।
- झोटा के परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आश्वासन।
- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का भरोसा।
मानसा। परविंदर सिंह झोटा को इंसाफ दिलाने के लिए जारी संघर्ष के 23वें दिन अहम घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों और एक्शन कमेटी के बीच करीब पांच घंटे तक चली बैठक में कई मांगों पर सहमति बन गई। बैठक में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में जेल में बंद लक्खा सिधाना सहित अन्य नेताओं को रिहा करने पर सहमति बनी है। एक्शन कमेटी ने स्पष्ट किया है कि नेताओं के जेल से बाहर आने के बाद ही परमिंदर सिंह झोटा का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
सरकार की ओर से झोटा के परिवार को दो करोड़ रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का भरोसा दिया गया है। इसके साथ ही दलजीत सिंह भम्मे के परिवार को भी नौकरी और मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया है।
एक्शन कमेटी के मीडिया इंचार्ज हरदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि बैठक में सबसे अधिक चर्चा लक्खा सिधाना और अन्य नेताओं की रिहाई को लेकर हुई। इस मुद्दे पर काफी देर तक सहमति नहीं बन पा रही थी। एक्शन कमेटी नेताओं की रिहाई से पहले पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार कराने के लिए तैयार नहीं थी।
उन्होंने बताया कि ख्याला कलां में परमिंदर सिंह झोटा के नाम पर ट्रॉमा सेंटर बनाने के प्रस्ताव को एक सप्ताह के भीतर मंजूरी देने पर भी सहमति बनी है। इसके अलावा संबंधित पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के खिलाफ समयबद्ध तरीके से उच्चस्तरीय जांच कराने का आश्वासन भी दिया गया है।
झोटा की याद में स्मारक या प्रतिमा स्थापित करने की मांग पर भी सहमति बनी है। हालांकि, घटना स्थल पर प्रतिमा लगाने को लेकर सहमति नहीं बन सकी। सरकार के प्रतिनिधियों ने बताया कि घटनास्थल निजी संपत्ति होने के कारण वहां प्रतिमा स्थापित करने में कानूनी दिक्कत आ सकती है।
एक्शन कमेटी ने गिरफ्तार नेताओं को बिना शर्त रिहा करने और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी उठाई। इसके अलावा 13 अक्टूबर से शुरू हुए संघर्ष के दौरान भम्मे कलां, बुढलाडा और अकालिया से जुड़े दर्ज मामलों को रद करने की मांग की गई। पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में फ्लेक्स फाड़ने के मामलों के साथ झोटा के पिता और एंटी ड्रग टास्क फोर्स के कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज कथित झूठे मुकदमे वापस लेने की मांग भी रखी गई।
बैठक के बाद 5 नवंबर को मुख्यमंत्री की रिहायश का घेराव करने का ऐलान फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। अब सरकार की ओर से किए गए आश्वासनों पर अमल और जेल में बंद नेताओं की रिहाई को लेकर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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