कृपया प्रतीक्षा करें…
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हादसे के बाद राहत और बचाव का काम करीब 27 घंटे तक चला। मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला गया। मृतकों में पांच छात्र भी शामिल हैं।

हादसे में सात लोगों की गई थी जान इमारत के निर्माण और मरम्मत की भी जांच जारी PG संचालन में परिवार की भूमिका खंगाल रही पुलिस बेसमेंट में चल रहे काम की भी जांच

हादसे के बाद एमसीडी और पुलिस की जांच में कई बिंदु सामने आए। 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी हादसे वाली इमारत। बेसमेंट में चल रहा निर्माण अनधिकृत बताया गया है।

हरिराम गुप्ता को मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। पुलिस ने अब उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता के नाम पर था।

राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस सांसद ने हादसों से पहले जरूरी सावधानी नहीं बरतने का आरोप लगाया।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत के सामने अपनी दलीलें रखीं। वकील ने कहा कि भारती की ओर से जातिसूचक गाली नहीं दी गई थी। बचाव पक्ष के मुताबिक, यह प्रतिक्रिया गंभीर उकसावे के जवाब में दी गई थी।

नागपुर स्थित कंपनी का भारतीय सशस्त्र बलों के साथ कोई कारोबारी संबंध नहीं है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, कंपनी ने रक्षा मंत्रालय को भी कोई सप्लाई नहीं की है। नेको डिफेंस ने हाल में इटली की डाटासेल कंपनी का अधिग्रहण किया है।

घटना की सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों की जवाबदेही पर टिप्पणी की। कोर्ट ने बचाव अभियान में प्रयास बढ़ाने के निर्देश दिए। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को राहत कार्यों को लेकर आश्वस्त किया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने आदेश सुनाया। शुक्रवार को पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया था। मामला 23 जून को हुए प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार पर कथित हमले से जुड़ा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ मामले की सुनवाई कर रही है। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने नवंबर में सुनवाई के लिए तारीख तय करने की मांग की।

हादसे के बाद मौके पर NDRF और CATS की टीमें पहुंचीं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हादसे वाली गली में जर्जर इमारतों को एमसीडी ने नोटिस जारी किए थे।

पांच मंजिला इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रह रहे थे। मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई थी। बचाव अभियान के दौरान मलबे से लोगों को बाहर निकाला गया।

लगभग 10 मिनट बाद 1:50 बजे टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। स्थानीय लोगों ने भी कंक्रीट के स्लैब हटाने में मदद की। इमारत में करीब 15 कमरे थे, जिनमें दो से तीन छात्र रहते थे।

हादसे के वक्त बड़ी संख्या में छात्र कमरों में मौजूद थे। दमकल की 8 गाड़ियां और कई बचाव दल मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों और छात्रों ने भी राहत कार्य शुरू किया।

एसी कमरे के लिए छात्रों को 15 से 20 हजार रुपये तक देने पड़ते हैं। अतिरिक्त सुविधाओं के साथ किराया 20 हजार रुपये से ऊपर पहुंच जाता है। दिल्ली विश्वविद्यालय के करीब 20 कॉलेज हॉस्टलों में लगभग चार हजार सीटें हैं।