चीनी मांझा- मोर, इंसान और सरकार

समाचार है कि मुजफ्फरनगर जनपद के कस्बा चरथावल में चीन में निर्मित मांझे से राष्ट्रीय पक्षी मोर की गर्दन कट गई। मोर ऐसा पक्षी है जो जंगलों में विचरण करता है और गांव-गली में भी आ जाता है क्योंकि कोई इसे क्षति नहीं पहुंचाता (सर्वभक्षी दुष्टों के अलावा)। चरथावल के पशु-पक्षी प्रेमियों ने घायल मोर का तत्काल इलाज कराया किन्तु वह बच न पाया। चरथावल के पक्षी प्रेमियों ने उसका विधिवत अंतिम संस्कार कर खेत में दफन कर दिया।
चीनी मांझे से न मोर या अन्य पक्षी मरे हैं, अपितु अनेक मनुष्यों की भी अकाल मौतें हुई हैं। मुजफ्फरनगर के पुरकाजी, जानसठ क्षेत्रों में भी लोग इसके शिकार हुए। 'देहात' के वरिष्ठ फोटोग्राफर राशिद खान की गर्दन में भी चीनी मांझा फंस गया था, जिससे वे बुरी तरह घायल हुए थे। हमें अफसोस रहेगा कि कोविड काल में वे हम सब से दूर हो गये।
अभी गत 14 जनवरी को जौनपुर जिले के धर्मपुर में समीर हाशमी नामक चिकित्सक की मृत्यु हो गई। डॉ हाशमी जौनपुर-आजमगढ़ मार्ग पर मोटरसाइकिल से जा रहे थे कि अचानक उनकी गर्दन में पतंग का चीनी मांझा फंस गया और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। इससे पूर्व जौनपुर के एक निजी स्कूल के प्रधान अध्यापक संदीप त्रिपाठी की 11 जनवरी को चीनी मांझे से मृत्यु हुई थी।
जौनपुर के हिमांशु श्रीवास्तव तथा 2 अन्य लोगों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चीनी मांझे के प्रयोग के विरुद्ध याचिका डाली थी। मुख्य न्यायधीश जस्टिस अरुण भंसाली व जस्टिस शैलेन्द्र ने अपने आदेश में सरकार से कहा है कि वह नागरिक की सुरक्षा को दृष्टिगत रख चीनी मांझे के निर्माण, बिक्री तथा प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए।
यूं तो सरकार को चीनी मांझे की विभीषिका पर स्वतः संज्ञान लेकर उस पर पाबन्दी लगा देनी थी, किन्तु अब उच्च न्यायालय के आदेश के पश्चात तो अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए।
गोविंद वर्मा
(संपादक 'देहात')
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