अहमदाबाद से देश की पहली LNG ट्रेन रवाना, अमित शाह ने साबरमती स्टेशन से दिखाई हरी झंडी

HIGHLIGHTS
- ट्रेन को साबरमती रेलवे स्टेशन से रवाना किया गया।
- साबरमती डिवीजन की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ।
- परियोजनाओं में कुल 1,472 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन से देश की पहली एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) से संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने साबरमती डिवीजन में भारतीय रेलवे की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि साबरमती डिवीजन में शुरू की गई विभिन्न रेलवे परियोजनाएं पर्यावरण संबंधी चिंताओं को दूर करने के साथ यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेंगी।
रेलवे की पूरी टीम को दी बधाई
अमित शाह ने कहा कि दिल्ली से यात्रा के दौरान वह कई बार साबरमती रेलवे स्टेशन पर उतर चुके हैं। उन्होंने लंबे समय बाद स्टेशन में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए रेलवे अधिकारियों और पूरी टीम को बधाई दी।
उन्होंने कहा, "साबरमती रेलवे डिवीजन से लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव तक पूरी टीम को मेरी हार्दिक बधाई। इतने लंबे समय बाद साबरमती स्टेशन को इस रूप में देखना बेहद खास है।"
अमित शाह ने कहा कि यात्री सुविधाओं, सुरक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुआ है। उनके मुताबिक, स्टेशन और रेलवे से संबंधित सुविधाओं में बड़ा परिवर्तन किया गया है। उन्होंने कहा, "यात्री सुविधा, सुरक्षा और कनेक्टिविटी के मामले में व्यापक बदलाव किया गया है।"
1472 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात
अमित शाह ने बताया कि रविवार को जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया और जिनकी आधारशिला रखी गई, उनमें कुल 1,472 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र के यात्रियों को काफी फायदा मिलेगा।
उन्होंने रेलवे की ओर से शुरू की जा रही इन सुविधाओं को यात्री सुविधा, सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़ी जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
साबरमती रेलवे स्टेशन और इसके आसपास का रेल ढांचा गुजरात में चल रही बड़ी रेलवे परियोजनाओं का हिस्सा है। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत साबरमती को मल्टीमॉडल हब के तौर पर विकसित किया जा रहा है। यहां बुलेट ट्रेन, मेट्रो, बीआरटीएस और रेलवे नेटवर्क को जोड़ा जाना है।
डीजल की खपत में करीब 40 प्रतिशत कमी की उम्मीद
रेलवे के अनुसार, एलएनजी-डीजल दोहरे ईंधन वाली प्रणाली अपनाने से डीजल की खपत में करीब 40 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद है। इससे ईंधन लागत कम होने के साथ कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन में भी कमी आएगी।
साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो की 1,400-1,400 हॉर्सपावर क्षमता वाली दो ड्राइविंग पावर कारों को एलएनजी-डीजल दोहरे ईंधन प्रणाली में परिवर्तित किया गया है। इनका इस्तेमाल आठ कोच वाली ट्रेन के संचालन में किया जाएगा।
हर इंजन से सालाना करीब 11.9 लाख रुपये बचत का अनुमान
रेलवे के मुताबिक, एलएनजी के इस्तेमाल से डीजल के मुकाबले ईंधन लागत कम होने की उम्मीद है। प्रत्येक इंजन से सालाना करीब 11.9 लाख रुपये की बचत का अनुमान है। दो इंजनों के हिसाब से यह बचत करीब 23.9 लाख रुपये सालाना होगी।
एलएनजी आधारित परिचालन से कार्बन उत्सर्जन के अलावा नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य प्रदूषकों के उत्सर्जन में भी कमी आने की उम्मीद है। इससे रेलवे परिचालन को अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
जरूरत के अनुसार एलएनजी और डीजल का इस्तेमाल
दोहरे ईंधन वाली प्रणाली को इस तरह तैयार किया गया है कि पारंपरिक डीजल इंजन की शक्ति, विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता बनी रहे। इंजन एलएनजी और डीजल दोनों से चल सकता है और आवश्यकता के अनुसार दोनों ईंधनों के बीच स्विच किया जा सकता है।
यदि किसी स्थान पर एलएनजी उपलब्ध नहीं होती है, तो ट्रेन को डीजल से चलाया जा सकेगा। इससे ईंधन की उपलब्धता से जुड़ी समस्या के कारण लंबी दूरी के परिचालन में रुकावट की संभावना कम होने की बात कही गई है।
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