हिमाचल में सेब का समर्थन मूल्य बढ़ा, सीएम सुक्खू ने 13 रुपये करने का किया ऐलान

HIGHLIGHTS
- मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को रोहड़ू का दौरा किया।
- चिड़गांव में जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने कई घोषणाएं कीं।
- मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सेब का समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को शिमला जिले के रोहड़ू दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। चिड़गांव में जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अगले शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई स्कूल शुरू करने का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने सेब के समर्थन मूल्य में एक रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की।
अब मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत सेब का समर्थन मूल्य 12 रुपये से बढ़कर 13 रुपये हो जाएगा। चिड़गांव पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।
रोहड़ू स्कूल के नए भवन के लिए मिलेंगे दो करोड़, विद्यार्थियों से किया संवाद
मुख्यमंत्री सुक्खू ने रोहड़ू स्थित पीएम श्री राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सीबीएसई के विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों के सवालों के जवाब दिए और उनकी जिज्ञासाओं तथा विचारों को सुना।
संवाद के दौरान एक छात्रा ने स्कूल के नए भवन की मांग रखी। इस पर मुख्यमंत्री ने नए भवन के निर्माण के लिए दो करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नए भवन के लिए यह राशि पर्याप्त नहीं होगी और जरूरत के अनुसार राज्य सरकार अतिरिक्त धनराशि भी उपलब्ध कराएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए परिसर के निर्माण में कुछ समय लगेगा, लेकिन सरकार का लक्ष्य प्रदेश में सीबीएसई स्कूलों के लिए आधुनिक और बेहतर सुविधाओं से युक्त उत्कृष्ट परिसरों का निर्माण करना है।
छात्रा ने बताया कि सीबीएसई स्कूल बनने के बाद रोहड़ू स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है और अब दो शिफ्ट में कक्षाएं चलानी पड़ रही हैं। इसी वजह से नए भवन की आवश्यकता है।
सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी क्षेत्र में सीबीएसई स्कूल खोलने पर विशेष जोर दे रही है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें निजी स्कूलों के समान आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकें।
सरकार हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही: सीएम
एक विद्यार्थी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण काम लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करना है या अपने समय का प्रबंधन करना। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन प्रदेश की आर्थिक स्थिति में समयबद्ध सुधार लाना सबसे बड़ी चुनौती रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में प्रदेश को देश के अग्रणी और समृद्ध राज्यों में शामिल करना सरकार का लक्ष्य है।
यूकेजी के एक विद्यार्थी ने ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से बचपन में दादा-दादी द्वारा सुनाई जाने वाली कहानियों के बारे में सवाल किया। मुख्यमंत्री ने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए बताया कि सर्दियों में परिवार के सदस्य आग के सामने बैठकर उन्हें कहानियां सुनाया करते थे। उन्होंने ‘सात बहनों’ की कहानी का भी जिक्र किया।
विद्यार्थियों ने एआई और रोजगार पर भी सीएम से पूछे सवाल
एक विद्यार्थी ने एआई के बढ़ते इस्तेमाल से बच्चों के बौद्धिक विकास पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई आधुनिक समय की महत्वपूर्ण तकनीक है, लेकिन इसका प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए शिक्षा और ज्ञान का मजबूत आधार जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर पढ़ाई करने की अपील की और कहा कि शिक्षा ही उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएगी।
रोजगार के अवसरों से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए अच्छी शिक्षा सबसे जरूरी है। शिक्षा उनकी सोचने-समझने की क्षमता विकसित करती है और भविष्य में सही दिशा चुनने में मदद करती है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वरोजगार को भी बढ़ावा दे रही है, ताकि युवा अपने लिए रोजगार के नए अवसर स्वयं पैदा कर सकें।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से संवाद के दौरान कहा कि हिमाचल प्रदेश का भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के साथ आर्थिक रूप से मजबूत और समृद्ध प्रदेश के तौर पर विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर विधायक मोहन लाल ब्राक्टा, नशा निवारण बोर्ड के सह-संयोजक संजय भारद्वाज, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह और अन्य गणमान्य मौजूद रहे।
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