चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों के बीच बैठक, SIR और 97 मतदाताओं पर EC ने दी सफाई

HIGHLIGHTS
- आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र की वजह स्पष्ट की।
- पत्र प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।
- आयोग ने पत्र को आईटी डिविजन की नीति से जुड़ा होने से इनकार किया।
नई दिल्ली। चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की बैठक हुई। इसी बीच आयोग ने कई मुद्दों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आयोग ने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र उसकी किसी नीति या आईटी विभाग से जुड़ा मामला नहीं था, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहे एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।
एक मीडिया रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच कुछ फैसलों को लेकर मतभेद की बात सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों में सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसे नोट और अलग-अलग सुझाव आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और पिछले एक साल में आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र पर आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या आईटी डिविजन से संबंधित नहीं था। आयोग के मुताबिक, यह पत्र प्रतिनियुक्ति पर आयोग में काम कर रहे एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था।
आयोग ने बताया कि संबंधित अधिकारी ने काम के पुनर्वितरण को लेकर जो आदेश जारी किए थे, उन्हें वास्तव में लागू नहीं किया गया। दोनों चुनाव आयुक्तों के आदेश के बाद काम के पुनर्वितरण से संबंधित आदेश लागू नहीं हुए थे।
आयोग के अनुसार, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की आईटी डिविजन पर निगरानी कभी वापस नहीं ली गई। इस तरह आईटी डिविजन की निगरानी हटाए जाने की बात को आयोग ने सही नहीं माना है।
गोवा के 97 मतदाताओं पर क्या है स्थिति?
गोवा में एसआईआर के दौरान छूटे 97 मतदाताओं को लेकर भी आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के मुताबिक, गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ को इन मतदाताओं के घर जाकर उनके फॉर्म लेने का निर्देश दिया है।
आयोग ने बताया कि 97 में से 81 मतदाता पहले ही फॉर्म-6 भर चुके हैं, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सके।
एसआईआर के बाद छूटे नाम कैसे जुड़ेंगे?
चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर अब तक 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हो चुका है, जिसमें बिहार और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं। आयोग ने कहा कि एसआईआर के दौरान या उसके बाद यदि किसी व्यक्ति का नाम छूट गया है तो वह संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ के पास नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है।
यह सुविधा युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के लिए भी उपलब्ध है। आयोग ने सीईओ, डीईओ और ईआरओ को ऐसे मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी दावे-आपत्तियों की समयसीमा
चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा में भी बदलाव किया है। आयोग के अनुसार, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं नोटिस और दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक कर दी गई है।
महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 और इनके निपटारे की तारीख 10 नवंबर 2026 कर दी गई है।
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