संगरूर हादसे में 8 मजदूरों की मौत, सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर लोगों में रोष

HIGHLIGHTS
- हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
- मजदूरों की मौत से इलाके में नाराजगी
- सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर उठी चिंता
संगरूर। लहरागागा-जाखल रोड पर रविवार दोपहर बाद वीबी जीरामजी (मनरेगा) मजदूरों के साथ हुए भीषण सड़क हादसे ने संबंधित विभागों की लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी को उजागर कर दिया है। इस घटना ने सितंबर 2024 में सुनाम-पटियाला रोड पर गांव बिशनपुरा के पास हुए हादसे की याद भी ताजा कर दी। उस समय सड़क किनारे काम कर रहे 4-5 मनरेगा मजदूरों को एक बेकाबू ट्रक ने कुचल दिया था।
ताजा हादसे के बाद एक बार फिर सड़क पर काम करने वाले मनरेगा मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि मुख्य सड़क पर काम करवाते समय निगरानी और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। सड़क किनारे बैरिकेडिंग नहीं की गई थी और न ही मौके पर निगरानी के लिए किसी विभागीय अधिकारी को तैनात किया गया था।
हादसे के दौरान मजदूरों की निगरानी के लिए कोई कर्मचारी नहीं था
मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। यहां तक कि उन्हें रिफ्लेक्टर जैकेट भी नहीं पहनाई गई थी। इसके अलावा, काम चलने की जानकारी देने वाला कोई रिफ्लेक्टर या सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया था।
हादसे के बाद मजदूर संगठनों ने घटनास्थल के पास जाखल रोड पर धरना देकर सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के प्रति नाराजगी जताई।
जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के प्रतिनिधि बिक्कर सिंह हथोआ, मजदूर मुक्ति मोर्चा के नेता गोबिंद सिंह छाजली और गांव अलीशेर के बड़ी संख्या में ग्रामीणों व पंचायत प्रतिनिधियों ने घटना पर रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हादसे के लिए कार चालक के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की भी जिम्मेदारी बनती है, क्योंकि मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरती गई।
उनका कहना था कि हादसे के समय लेबर विभाग, पंचायत विभाग या सिविल प्रशासन का कोई अधिकारी अथवा कर्मचारी जीरामजी मजदूरों की निगरानी के लिए मौके पर मौजूद नहीं था।
उन्होंने मांग की कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि पहले भी इस तरह का हादसा हो चुका है, लेकिन सरकार और प्रशासन ने उससे कोई सबक नहीं लिया। अब दोबारा हुई इस घटना से कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
एंबुलेंस पहुंचने में देरी से ग्रामीणों में नाराजगी
प्रत्यक्षदर्शी फैक्ट्री कर्मचारी हरविंदर सिंह उर्फ लवी ने बताया कि हादसे की आवाज सुनकर वह सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचा था। वहां कई महिला मजदूर कार की चपेट में आने के बाद दर्द से कराह रही थीं, जबकि घायल मजदूर सड़क पर इधर-उधर पड़े थे। उन्होंने कहा कि उस समय महिला मजदूरों के साथ कोई अन्य व्यक्ति या अधिकारी मौजूद नहीं था।
इसके बाद धीरे-धीरे राहगीर और ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचने लगे। लोगों ने एंबुलेंस और पुलिस को फोन कर सहायता मांगी, लेकिन उनके मुताबिक, करीब एक घंटे बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची।
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि मजदूरों को कुचलने वाला वाहन चालक करीब 15 मिनट तक मौके पर रुका रहा। पुलिस के पहुंचने के बाद वह वहां से भाग गया।
समय पर सहायता नहीं मिलने का आरोप
गांव अलीशेर के पंच अमृतपाल सिंह और हरप्रीत सिंह अलीशेर ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद एंबुलेंस और चोटियां चौकी पुलिस को सूचना दी गई थी। इसके बावजूद काफी देर तक एंबुलेंस घटनास्थल पर नहीं पहुंची, जिससे घायलों को अस्पताल ले जाने में परेशानी हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि समय पर सहायता नहीं मिलने के कारण कई मजदूरों की जान चली गई। उनका कहना था कि यदि समय रहते मदद मिल जाती, तो कई मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी।
पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे और नौकरी की मांग
सिविल अस्पताल लहरागागा पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल के पुत्र राहुल इंद्र सिद्धू ने घायलों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने हादसे के लिए जिम्मेदार कार चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
राहुल इंद्र सिद्धू ने कहा कि पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए और प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकार की ओर से नौकरी मिलनी चाहिए। उन्होंने इस हादसे को सरकारी लापरवाही का परिणाम बताते हुए कहा कि जीरामजी (मनरेगा) मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किए गए थे।
लापरवाही करने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई: डीसी
डीसी पूनमदीप कौर ने कहा कि वीबी जीरामजी (मनरेगा) के तहत काम करवाने वाले संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि काम के दौरान निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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